एक पेशेवर डॉक्टर का नाम सुनकर अक्सर लोग भरोसा करते हैं. लेकिन गुजरात ATS की ताजा कार्यवाही ने यह साबित कर दिया है कि खुले समाज में भी खतरनाक कटे हुए तत्व छिपे हो सकते हैं. राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों को लंबे समय से सतर्क रहने की जरूरत है. इस केस में विदेश से जुड़े हैंडलर और स्थानीय नेटवर्क दोनों की परतें सामने आई हैं. अब मामला जांच एजेंसियों और अदालत के समक्ष है. चलिए विस्तार से जानते हैं क्या मिला और किस तरह की साजिश रची जा रही थी.
गुजरात ATS ने गांधीनगर के अडालज इलाके में छापा मारकर डॉक्टर डॉ. अहमद मोहिउद्दीन सैयद को गिरफ्तार किया है. उसके साथ आजाद सुलेमान शेख और मोहम्मद सुहैल मोहम्मद सलीम को भी पकड़ा गया. ATS के DIG सुनील जोशी ने बताया कि तीनों ने लखनऊ, दिल्ली और अहमदाबाद की कई संवेदनशील जगहों की रेकी की थी. पूछताछ में पता चला कि इनके निशाने धार्मिक स्थल और भीड़भाड़ वाले क्षेत्र थे.
गिरफ्तारगी के दौरान सैयद के पास से चार लीटर अरंडी का तेल बरामद हुआ. इसके अलावा तीन मोबाइल फोन, दो लैपटॉप, दो ग्लॉक पिस्तौल, एक बरेटा पिस्तौल और तीस जिंदा कारतूस मिले. ATS का कहना है कि सैयद अरंडी के बीजों के अवशेष से राइसिन जैसा विष बनाने का प्रयास कर रहा था. राइसिन बहुत ही घातक है और बहुत कम मात्रा में भी जानलेवा साबित हो सकता है. शुरुआती केमिकल प्रोसेसिंग की निशानियां भी उसके पास पाई गयीं.
पुलिस की पूछताछ में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि सैयद का हैंडलर अफगानिस्तान निवासी अबू खदीजा था. अबू खदीजा इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रोविंस से जुड़ा रहा है और पाकिस्तान में सक्रिय रेंजर्स के संपर्क में था. ATS के अनुसार वही हैंडलर सैयद को निर्देश और फंडिंग भेजता था. वह ड्रोन के जरिये सीमा पार हथियारों की सप्लाई और भर्ती नेटवर्क खड़ा करने की कोशिशों में शामिल था. साथ ही सोशल मीडिया के जरिए स्लीपर सेल और फंडिंग चैनल बनाने के प्रयास भी देखे गए.
ISKP इस्लामिक स्टेट का खुरासान विंग है जिसका मुख्य ऑपरेटिंग जोन अफगानिस्तान पाक सीमा का क्षेत्र माना जाता है. यह समूह आत्मघाती और हिट एंड रन हमलों में सक्रिय रहा है. उसने ऑनलाइन रिक्रूटमेंट, तस्करी नेटवर्क और क्रिप्टो के जरिए संचालन किया है. इतिहास में इसका संबंध कई बड़े हमलों से जुड़ा रहा है और वैश्विक जिहादी नेटवर्क से इसका रिश्ता प्रमाणित रहा है.