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राजनीति में लहराए कट्टे, फिर बना ऐसा विलेन कि कांप उठे हीरो, हर किरदार में इस एक्टर ने जमाया रंग

बॉलीवुड के दमदार एक्टर आशुतोष राणा आज अपना 58वां जन्मदिन मना रहे हैं. कॉलेज के दिनों में छात्र राजनीति से लेकर फिल्मों में डर पैदा करने वाले विलेन बनने तक, उनका सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रहा.

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Edited By: Babli Rautela
राजनीति में लहराए कट्टे, फिर बना ऐसा विलेन कि कांप उठे हीरो, हर किरदार में इस एक्टर ने जमाया रंग
Courtesy: Social Media

मुंबई: आशुतोष राणा, एक ऐसा नाम जो अभिनय, अभिव्यक्ति और गंभीरता का पर्याय बन चुका है. उन्होंने 1990 के दशक में टीवी से शुरुआत की और फिल्मों में अपने दमदार अभिनय से दर्शकों को झकझोर दिया. उनके किरदारों में इतनी सच्चाई और ताकत होती है कि दर्शक उन्हें पर्दे से जोड़कर असल जिंदगी तक महसूस करते हैं. लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि फिल्मों में आने से पहले आशुतोष राजनीति की गलियों में ‘कट्टा’ लहराते नजर आते थे. 

आशुतोष राणा का जन्म मध्य प्रदेश के जबलपुर के पास गाडरवारा कस्बे में हुआ था. बचपन से ही वह मंच पर सक्रिय थे और कॉलेज पहुंचने के बाद छात्र राजनीति में उनका रुझान बढ़ा. सागर विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान वह छात्र नेता के रूप में काफी सक्रिय रहे. 

जब आशुतोष राणा ने लहराया था कट्टा

उनकी पत्नी रेनुका शहाणे ने एक बार एक इंटरव्यू में बताया था, “हम शादी से पहले ट्रेन में जा रहे थे. तभी राणा जी के दोस्तों ने किस्से सुनाने शुरू किए और एक ने कहा, ‘भइया वो वाला किस्सा सुनाइए जब आपने कट्टा लहरा दिया था.’ ये सुनकर मेरे परिवार वाले हैरान रह गए.' राजनीति और जोश भरे उस दौर के बाद, गुरु के कहने पर उन्होंने कला की दुनिया में कदम रखा और मुंबई पहुंच गए.

मुंबई आने के बाद आशुतोष राणा ने टेलीविजन से अपने करियर की शुरुआत की. उन्होंने ‘स्वाभिमान’, ‘फर्ज’, ‘सजलता दीपक’ और ‘फूलों का तारा’ जैसे सीरियल्स में काम किया. टीवी पर उनके अभिनय को पहचान मिली, और इसी दौरान फिल्म इंडस्ट्री के दरवाजे उनके लिए खुल गए. उनकी गहरी आवाज और गहन अभिव्यक्ति ने जल्द ही निर्देशकों का ध्यान खींच लिया.

‘दुश्मन’ के गोकुल पंडित से बना डर का चेहरा

1998 में आई फिल्म ‘दुश्मन’ ने आशुतोष राणा को रातों-रात स्टार बना दिया. इस फिल्म में उन्होंने एक साइकॉपैथिक किलर गोकुल पंडित का किरदार निभाया था, जिसने दर्शकों को अंदर तक डरा दिया. उनकी आंखों की ठंडक और आवाज की गंभीरता ने इस किरदार को अमर बना दिया. यह किरदार आज भी बॉलीवुड के सबसे भयानक विलेन में गिना जाता है. इसके बाद उन्होंने ‘संघर्ष’, ‘कसूर’, ‘राज’, ‘Humpty Sharma Ki Dulhania’ और ‘टाइगर ज़िंदा है’ जैसी फिल्मों में भी दमदार भूमिकाएं निभाईं.