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India Daily

हॉर्मुज संकट के बीच भारत की बड़ी कूटनीतिक सफलता, भारतीय जहाज ग्रीन आशा ने पार किया जलडमरूमध्य

खाड़ी क्षेत्र में तनाव के बावजूद भारतीय झंडे वाले जहाज हॉर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित पार कर रहे हैं, जिससे ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं कम हुई हैं. आठवें भारतीय झंडे वाले जहाज के रूप में ग्रीन आशा ने सफलतापूर्वक अपनी यात्रा पूरी कर ली है.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
हॉर्मुज संकट के बीच भारत की बड़ी कूटनीतिक सफलता, भारतीय जहाज ग्रीन आशा ने पार किया जलडमरूमध्य
Courtesy: grok

नई दिल्ली: मध्य पूर्व में चल रहे तनाव के बीच भी भारतीय झंडे वाले जहाज हार्मुज जलडमरूमध्य को बिना किसी समस्या के पार कर रहे हैं. यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए राहत की खबर है. ताजा अपडेट में ग्रीन आशा नामक भारतीय जहाज ने सफलतापूर्वक जलडमरूमध्य पार किया है. इससे फरवरी 28 के बाद से ऐसे आठ भारतीय जहाज इस रास्ते से गुजर चुके हैं. इससे पहले शुक्रवार रात को ग्रीन सानवी नामक जहाज ने भी सुरक्षित पार किया था, जो करीब 46,650 मीट्रिक टन एलपीजी ले जा रहा था. भारतीय नौसेना ने व्यापारी जहाजों की मदद के लिए युद्धपोत तैयार रखे हैं.

ग्रीन आशा ने पूरा किया सुरक्षित सफर

ग्रीन आशा जहाज ने हार्मुज जलडमरूमध्य को पार कर लिया है. यह घटना क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बावजूद हुई है. जहाज लगभग 20,000 टन एलपीजी ले जा रहा था. भारतीय शिपिंग मंत्रालय के अनुसार, यह आठवां या नौवां भारतीय झंडे वाला जहाज है जो फरवरी के अंत से अब तक इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से गुजरा है. ईरान ने क्षेत्र में कुछ जहाजों पर हमले किए हैं, जिससे वाणिज्यिक नौवहन जोखिम भरा हो गया है. फिर भी भारतीय जहाजों की आवाजाही जारी है, जो ऊर्जा आयात के लिए जरूरी है. भारत दुनिया के पेट्रोलियम का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से मंगाता है.

ग्रीन सानवी की सफल क्रॉसिंग

इससे पहले शुक्रवार रात को ग्रीन सानवी जहाज ने भी हार्मुज को सुरक्षित पार किया. यह जहाज करीब 46,650 मीट्रिक टन तरलीकृत पेट्रोलियम गैस यानी एलपीजी से लदा था. आधिकारिक सूत्रों ने इसकी पुष्टि की है. जहाज पर 25 नाविक सवार थे. ग्रीन सानवी अब भारत की ओर बढ़ रहा है. इसी तरह 28 मार्च को एमटी जग वसंत जहाज द्वारा लाई गई करीब 47,000 मीट्रिक टन एलपीजी गुजरात के वडिनार टर्मिनल पहुंची. वहां शिप-टू-शिप ऑपरेशन के जरिए माल दूसरे जहाज में ट्रांसफर किया जाएगा. ये घटनाएं दिखाती हैं कि चुनौतियों के बावजूद आपूर्ति श्रृंखला बनी हुई है.

नौसेना और कूटनीति की भूमिका 

भारतीय नौसेना ने व्यापारी जहाजों की सुरक्षा के लिए युद्धपोतों को स्टैंडबाय पर रखा है. जरूरत पड़ने पर तुरंत मदद मुहैया कराई जाएगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ईरानी अधिकारियों से संपर्क बनाए रखा है. उन्होंने भारतीय जहाजों और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है. ईरानी दूतावास ने भी भारत को आश्वासन दिया कि भारतीय मित्र सुरक्षित हाथों में हैं. कोई घबराने की जरूरत नहीं है. कूटनीतिक प्रयासों से जहाजों की आवाजाही सुगम बनी हुई है.

हॉर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व

हॉर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को विश्व महासागरों से जोड़ने वाला संकीर्ण समुद्री मार्ग है. ओपेक देशों का तेल परिवहन इसी रास्ते होता है. दुनिया के कुल पेट्रोलियम का करीब एक-पांचवां हिस्सा यहीं से गुजरता है. यह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार का महत्वपूर्ण चोकपॉइंट है. क्षेत्र में तनाव बढ़ने से नौवहन प्रभावित हुआ है. ईरान कुछ जहाजों को दुश्मन मानकर हमले कर रहा है. भारत जैसे देशों के लिए यह मार्ग एलपीजी और कच्चे तेल के आयात के लिए बेहद जरूरी है. सुरक्षित पारगमन से ऊर्जा की कीमतों पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ेगा.