नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में युद्ध के बादल मंडराने लगे हैं और ईरान में सुरक्षा स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है. इस गंभीर संकट को देखते हुए तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने वहां रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं. दूतावास ने अगले 48 घंटों को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया है और नागरिकों से सतर्क रहने को कहा है. इसी बीच, डोनाल्ड ट्रंप के कड़े और विनाशकारी बयानों ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में खलबली मचा दी है, जिससे हालात और भी तनावपूर्ण हो गए हैं.
ईरान में मौजूद भारतीयों के लिए दूतावास ने एक नई और सख्त चेतावनी जारी की है. इसमें सभी नागरिकों से अपील की गई है कि वे अगले दो दिनों तक अनिवार्य रूप से अपने घरों या सुरक्षित आवासों के भीतर ही रहें. दूतावास ने विशेष रूप से बिजली के बुनियादी ढांचों और सैन्य ठिकानों से दूर रहने की सलाह दी है. जोखिम को देखते हुए बहुमंजिला इमारतों की ऊपरी मंजिलों पर जाने से भी मना किया गया है ताकि संभावित हमलों या खतरों से बचा जा सके.
दूतावास ने पिछले निर्देशों को दोहराते हुए कहा है कि राजमार्गों पर यात्रा करना इस समय बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं है. यदि किसी को अपरिहार्य स्थिति में यात्रा करनी ही पड़े, तो उसे दूतावास के साथ कड़ा समन्वय करना होगा. जो भारतीय दूतावास द्वारा व्यवस्थित आवासों या होटलों में रह रहे हैं, उन्हें अपने कमरे न छोड़ने का आदेश दिया गया है. होटलों में दूतावास की टीमें तैनात हैं और नागरिकों को उनके साथ निरंतर संपर्क बनाए रखना होगा.
भारतीय नागरिकों की सुविधा के लिए दूतावास ने 24 घंटे सक्रिय रहने वाले आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर साझा किए हैं. संकट में फंसे लोग +989128109115, +989128109102, +989128109109 और +989932179359 पर किसी भी समय कॉल कर सकते हैं. इसके अलावा, सहायता के लिए ईमेल आईडी [email protected] भी उपलब्ध कराई गई है. दूतावास ने सभी से केवल आधिकारिक अपडेट्स पर भरोसा करने और अफवाहों से दूर रहने का अनुरोध किया है ताकि सुरक्षा बनी रहे.
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को ईरान को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला बयान दिया है. उन्होंने ईरान को मंगलवार की समय सीमा से पहले समझौता करने की अंतिम चेतावनी दी है. ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा कि यदि ऐसा नहीं हुआ, तो एक पूरी सभ्यता का अंत हो जाएगा, जिसे दोबारा कभी पुनर्जीवित नहीं किया जा सकेगा. उनके इस बयान ने वैश्विक सुरक्षा विशेषज्ञों के बीच परमाणु युद्ध की आशंकाओं को जन्म दे दिया है.