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India Daily

'उम्मीद है ये शांति लंबी चलेगी', US-ईरान सीजफायर पर भारत का पहला रिएक्शन, होर्मुज स्ट्रेट पर जताई चिंता

भारत ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए दो हफ्ते के युद्धविराम का स्वागत किया है. विदेश मंत्रालय ने स्थायी शांति की उम्मीद जताई और होर्मुज जलडमरूमध्य में निर्बाध व्यापार व ऊर्जा आपूर्ति पर जोर दिया. ईरान ने इसे अपनी जीत बताया है.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
'उम्मीद है ये शांति लंबी चलेगी', US-ईरान सीजफायर पर भारत का पहला रिएक्शन, होर्मुज स्ट्रेट पर जताई चिंता
Courtesy: grok

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में लंबे समय से चल रहे तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्तों के युद्धविराम पर सहमति बनने के बाद भारत की पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया आई है. विदेश मंत्रालय ने इस विकास का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि इससे क्षेत्र में स्थायी शांति कायम होगी. मंत्रालय ने कहा कि संघर्ष से पहले ही लोगों को काफी कष्ट झेलना पड़ा है और वैश्विक व्यापार प्रभावित हुआ है. भारत खासतौर पर होर्मुज स्ट्रेट के जरिए ऊर्जा आपूर्ति और नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखने पर बल दे रहा है.

भारत का आधिकारिक बयान

विदेश मंत्रालय (MEA) ने जारी बयान में युद्धविराम का स्वागत किया और कहा कि तनाव कम करना, बातचीत और कूटनीति से ही इस संघर्ष को जल्द खत्म किया जा सकता है. मंत्रालय ने जोर देकर कहा कि पिछले एक महीने से ज्यादा समय से चल रहे इस युद्ध ने आम लोगों को भारी परेशानी में डाला है. साथ ही वैश्विक ऊर्जा बाजार और व्यापार नेटवर्क भी बाधित हुए हैं. भारत की उम्मीद है कि अब होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते जहाजों की आवाजाही बिना किसी रुकावट के जारी रहेगी, जिससे दुनिया भर की ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित न हो.

ईरान का दावा और 10-सूत्रीय प्रस्ताव

युद्धविराम की घोषणा के बाद ईरान ने इसे अपनी ऐतिहासिक जीत बताया है. तेहरान का कहना है कि अमेरिका ने उसके 10-सूत्रीय प्रस्ताव को सैद्धांतिक रूप से मान लिया है. ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया पर लिखा कि अगर हमलों पर रोक लग जाती है तो ईरान भी अपना बचाव अभियान रोक देगा. हालांकि, फारसी और अंग्रेजी में जारी बयानों में कुछ विरोधाभास दिखाई दिए हैं. कुछ बयानों में यूरेनियम संवर्धन जैसे मुद्दों पर व्यापक दावे किए गए हैं. डोनाल्ड ट्रंप ने भी दो हफ्ते के इस सीजफायर की पुष्टि की है.

क्षेत्रीय शांति की उम्मीद

भारत ने बार-बार कहा है कि पश्चिम एशिया में शांति स्थापित होना सभी के हित में है. MEA का बयान स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि भारत चाहता है कि बातचीत के जरिए सभी मुद्दों का समाधान निकाला जाए. होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के बड़े हिस्से की तेल आपूर्ति का मुख्य रास्ता है. अगर यहां आवाजाही सुचारू रही तो भारत जैसे देशों का आयात बिल कम हो सकता है और महंगाई पर भी नियंत्रण रखने में मदद मिलेगी. विशेषज्ञों का मानना है कि यह युद्धविराम एक सकारात्मक शुरुआत है लेकिन स्थायी समाधान के लिए आगे कूटनीतिक प्रयास जरूरी हैं.

भविष्य की चुनौतियां

युद्धविराम के बावजूद कई सवाल अभी बाकी हैं. ईरान और अमेरिका दोनों पक्षों के बयानों में विरोधाभास देखने को मिल रहे हैं. भारत ने सतर्कता बरतते हुए अपने नागरिकों को ईरान से जल्द निकलने की सलाह भी दी है. कुल मिलाकर यह घटनाक्रम वैश्विक स्तर पर राहत की खबर है लेकिन स्थायी शांति के लिए सभी पक्षों को धैर्य और समझदारी दिखानी होगी. भारत की कूटनीति हमेशा क्षेत्रीय स्थिरता और बातचीत पर आधारित रही है. अब देखना होगा कि अगले दो हफ्तों में स्थिति कैसे विकसित होती है और क्या लंबे समय तक शांति बनी रह पाएगी.