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होर्मुज में फंसे 20,000 भारतीय नाविक! जंग के बीच भारत का बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फंसे भारतीय जहाजों और 20,000 नाविकों को सुरक्षित निकालने के लिए भारत ने विशेष ऑपरेशन शुरू किया है, जिससे ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार को राहत मिलने की उम्मीद है.

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Kuldeep Sharma

नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक बड़ी चिंता बन गया है. इस अहम समुद्री रास्ते में भारतीय जहाजों और हजारों नाविकों के फंसने की खबर ने सरकार को तुरंत कार्रवाई के लिए मजबूर कर दिया. ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार पर असर को देखते हुए भारत ने एक विशेष ऑपरेशन शुरू किया है. इसका उद्देश्य न सिर्फ जहाजों को सुरक्षित निकालना है, बल्कि वहां फंसे भारतीय नाविकों की जिंदगी भी बचाना है.

ऑपरेशन की शुरुआत और वजह

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव बढ़ने के बाद भारत ने तेजी से एक विशेष अभियान शुरू किया है. इस ऑपरेशन का मकसद वहां फंसे भारतीय जहाजों को सुरक्षित निकालना और देश की ऊर्जा आपूर्ति को बनाए रखना है. जानकारी के मुताबिक, इस क्षेत्र में कुल 18 जहाज फंसे हुए हैं, जिनमें से कई भारत के लिए जरूरी ईंधन लेकर आ रहे हैं. हालात बिगड़ने की आशंका के चलते सरकार ने समय रहते कदम उठाया, ताकि तेल और गैस की सप्लाई में किसी तरह की रुकावट न आए और देश की अर्थव्यवस्था पर असर कम से कम हो.

कौन-कौन से जहाज फंसे हैं

फंसे हुए जहाजों में विविध प्रकार का माल लदा हुआ है, जो भारत के लिए बेहद जरूरी है. इनमें 4 जहाज एलपीजी से भरे हैं, जबकि 3 जहाज एलएनजी लेकर आ रहे हैं. इसके अलावा 11 कच्चे तेल के टैंकर भी इस मार्ग में फंसे हुए हैं. इन जहाजों में से 5 भारतीय झंडे के तहत चल रहे हैं, जबकि बाकी भारतीय कंपनियों द्वारा लीज पर लिए गए हैं. एक एलपीजी जहाज ‘ग्रीन आशा’ इस क्षेत्र को पार कर मुंबई की ओर बढ़ चुका है, जिससे राहत की उम्मीद जगी है.

नाविकों की सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता

जहाजों के साथ-साथ इस संकट में 20,000 भारतीय नाविकों की सुरक्षा भी बड़ी चुनौती बन गई है. इनमें से सैकड़ों नाविक भारतीय झंडे वाले जहाजों पर काम कर रहे हैं. सरकार अब तक करीब 1,754 नाविकों को सुरक्षित निकाल चुकी है, जबकि बाकी को निकालने के प्रयास जारी हैं. अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन ने भी सुरक्षित निकासी के लिए सभी देशों से सहयोग की अपील की है. यह ऑपरेशन केवल जहाजों को बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें मानव जीवन को प्राथमिकता दी जा रही है.

बंदरगाहों पर असर और आगे की रणनीति

इस संकट का असर भारतीय बंदरगाहों पर भी साफ दिख रहा है, जहां बड़ी मात्रा में कंटेनर और खराब होने वाला माल फंसा हुआ है. रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 1 लाख TEU कंटेनर बंदरगाहों पर अटके हैं. ऐसे में सरकार ने बंदरगाहों को निर्देश दिया है कि इन जहाजों को प्राथमिकता दी जाए. साथ ही, शिपिंग कंपनियों को राहत देने के लिए डॉकिंग शुल्क कम करने पर भी विचार किया जा रहा है. आने वाले दिनों में हालात सामान्य करने के लिए भारत और भी सख्त और तेज कदम उठा सकता है.