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India Daily

भारत की बड़ी उपलब्धि, अक्षय ऊर्जा क्षमता में चीन और अमेरिका के बाद तीसरे स्थान पर हुआ काबिज

भारत ने अक्षय ऊर्जा क्षमता में ब्राजील को पीछे छोड़ते हुए दुनिया में तीसरा स्थान हासिल किया है. चीन और अमेरिका ही अब भारत से आगे हैं. यह उपलब्धि 2025 के आंकड़ों पर आधारित है.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
भारत की बड़ी उपलब्धि, अक्षय ऊर्जा क्षमता में चीन और अमेरिका के बाद तीसरे स्थान पर हुआ काबिज
Courtesy: pinterest

दुनिया भर में जलवायु परिवर्तन की चर्चा के बीच भारत ने अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में एक बड़ी सफलता हासिल की है. केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने बुधवार को बताया कि भारत अब वैश्विक स्तर पर अक्षय ऊर्जा स्थापित क्षमता में तीसरे नंबर पर पहुंच गया है. अंतरराष्ट्रीय अक्षय ऊर्जा एजेंसी द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025 के अंत तक भारत ने ब्राजील को पीछे छोड़ दिया. यह रिपोर्ट ‘रिन्यूएबल एनर्जी स्टैटिस्टिक्स 2026’ के तहत आई है. भारत के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि देश ने पेरिस समझौते के अपने लक्ष्यों को समय से पहले ही हासिल करना शुरू कर दिया है.

चीन और अमेरिका से अभी भी काफी पीछे भारत

रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में सबसे ज्यादा अक्षय ऊर्जा क्षमता चीन के पास है, जो 2,258.02 गीगावाट है. दूसरे नंबर पर अमेरिका 467.92 गीगावाट के साथ है. भारत इस सूची में 250.52 गीगावाट क्षमता के साथ तीसरे स्थान पर है. भारत के बाद ब्राजील (228.20 गीगावाट) और जर्मनी (199.92 गीगावाट) का नंबर आता है. मंत्री प्रल्हाद जोशी ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान अकेले भारत ने 55.3 गीगावाट की अक्षय ऊर्जा क्षमता जोड़ी है. यह बढ़ोतरी दिखाती है कि कैसे भारत सरकार ने हरित ऊर्जा पर अपना फोकस बढ़ाया है. खास बात यह है कि भारत ने जून 2025 में ही अपनी कुल बिजली उत्पादन क्षमता का 50 प्रतिशत गैर-जीवाश्म स्रोतों से हासिल कर लिया था, जो उसके पेरिस समझौते के लक्ष्य से पांच साल पहले की उपलब्धि है.

बिजली उत्पादन में बढ़ा अक्षय ऊर्जा का दबदबा

जुलाई 2025 का महीना भारत के लिए ऐतिहासिक रहा. इस दौरान देश की कुल बिजली मांग 203 गीगावाट थी, जिसमें से 51.5 प्रतिशत की पूर्ति अकेले अक्षय ऊर्जा ने की. यानी हर दूसरी बल्ब अब सौर या पवन ऊर्जा से जल रही थी. वित्तीय वर्ष 2025-26 (मार्च 2026 तक) में भारत का कुल बिजली उत्पादन 1,845.921 बिलियन यूनिट रहा. इसमें गैर-जीवाश्म ईंधन (नॉन-फॉसिल फ्यूल) की हिस्सेदारी 29.2 प्रतिशत यानी 538.97 बिलियन यूनिट थी. यह आंकड़ा बताता है कि भारत अब धीरे-धीरे कोयले पर अपनी निर्भरता कम कर रहा है और सौर तथा पवन जैसे साफ स्रोतों की तरफ बढ़ रहा है. केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री ने COP26 में जो 500 गीगावाट का लक्ष्य रखा था, उस पर तेजी से काम चल रहा है.

कैसी है भारत की मौजूदा ऊर्जा तस्वीर

31 मार्च 2026 तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो देश में कुल 283.46 गीगावाट की क्षमता गैर-जीवाश्म स्रोतों से स्थापित हो चुकी है. इसमें 274.68 गीगावाट अक्षय ऊर्जा और 8.78 गीगावाट परमाणु ऊर्जा शामिल है. अक्षय ऊर्जा में सबसे बड़ा योगदान सौर ऊर्जा का है, जो 150.26 गीगावाट के साथ टॉप पर है. उसके बाद पवन ऊर्जा (56.09 गीगावाट), बड़ी पनबिजली परियोजनाएं (51.41 गीगावाट), छोटी पनबिजली (5.17 गीगावाट) और बायोएनर्जी (11.75 गीगावाट) का नंबर आता है. यह विविधता दिखाती है कि भारत हर संभव साफ स्रोत का दोहन कर रहा है.

2035 तक उत्सर्जन तीव्रता में 47 प्रतिशत कटौती करेगा भारत

भारत अब यहीं नहीं रुकना चाहता. मार्च 2025 में ही भारत ने पेरिस समझौते के तहत अपने नए लक्ष्य तय किए थे. अब भारत 2035 तक उत्सर्जन तीव्रता (एमिशन इंटेंसिटी) में 47 प्रतिशत की कटौती करेगा. साथ ही, 2035 तक देश की कुल बिजली क्षमता का 60 प्रतिशत गैर-जीवाश्म स्रोतों से आना चाहिए. इसके अलावा, भारत 3.5 से 4 बिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड के बराबर का कार्बन सिंक (पेड़-पौधे) बनाने की दिशा में भी काम करेगा. मतलब साफ है कि हरित ऊर्जा की दौड़ में भारत अब तेज रफ्तार से दौड़ रहा है और आने वाले सालों में वह अमेरिका को भी पीछे छोड़ने की कोशिश करेगा.