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दुश्मनों की नींद उड़ाने का मास्टर प्लान तैयार! भारत खरीदेगा 100 से ज्यादा राफेल, जानें कितना होगा खर्च

भारतीय वायु सेना की घटती स्क्वाड्रन संख्या और बढ़ते क्षेत्रीय खतरों के बीच भारत 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने की तैयारी में है. यह डील वायुसेना की ताकत और आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन को मजबूती देगी.

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Kuldeep Sharma

नई दिल्ली: भारत अपनी वायु शक्ति को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है. रक्षा बजट में रिकॉर्ड बढ़ोतरी के बाद अब भारतीय वायु सेना के लिए 100 से अधिक राफेल लड़ाकू विमान खरीदने पर गंभीर विचार शुरू हो गया है. सीमा पर बदलते सुरक्षा समीकरण, पाकिस्तान-चीन गठजोड़ और घटती स्क्वाड्रन संख्या ने इस फैसले की जरूरत को और गहरा कर दिया है.

बड़ी डील पर हो रहा है मंथन

सूत्रों के अनुसार रक्षा मंत्रालय फ्रांस के साथ 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद पर चर्चा करने जा रहा है. इस प्रस्ताव की अनुमानित लागत करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये बताई जा रही है. फरवरी के तीसरे हफ्ते में फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के भारत दौरे से पहले इस डील पर उच्च-स्तरीय बैठक संभव है. रक्षा खरीद बोर्ड ने इस प्रस्ताव को पहले ही शुरुआती मंजूरी दे दी है.

वायुसेना की मौजूदा चुनौती

फिलहाल भारतीय वायु सेना के पास लगभग 30 फाइटर स्क्वाड्रन हैं, जबकि स्वीकृत संख्या 42 है. दूसरी ओर, पाकिस्तान और चीन के बीच बढ़ती सैन्य नजदीकी और क्षेत्रीय अस्थिरता ने खतरे को बढ़ा दिया है. ऐसे में वायुसेना को तुरंत आधुनिक और भरोसेमंद लड़ाकू विमानों की जरूरत महसूस हो रही है, जिसे राफेल डील से पूरा किया जा सकता है.

भारत में होगा अधिकांश निर्माण

प्रस्तावित डील के तहत खरीदे जाने वाले राफेल विमानों में से करीब 80 प्रतिशत का निर्माण भारत में किया जाएगा. योजना के अनुसार, 88 सिंगल-सीटर और 26 ट्विन-सीटर विमान भारतीय निजी कंपनियों के सहयोग से बनाए जाएंगे. इससे न केवल वायुसेना की क्षमता बढ़ेगी, बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को भी बल मिलेगा.

रक्षा बजट ने दी ताकत

वित्त वर्ष 2025-26 के लिए रक्षा मंत्रालय को 7.85 लाख करोड़ रुपये का बजट मिला है, जो पिछले साल से 15 प्रतिशत अधिक है. यह कुल बजट का लगभग 14.7 प्रतिशत है. सरकार का कहना है कि लगातार बढ़ते रक्षा बजट से सेना के आधुनिकीकरण को गति मिली है. हालांकि बजट अभी भी जीडीपी के करीब दो प्रतिशत पर ही है, लेकिन इसे रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है.