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सोनिया गांधी ने CM के तौर पर मेरा साथ दिया, लेकिन राहुल ने दखल दिया: हिमंत सरमा ने किया खुलासा

हिमंत बिस्वा सरमा जब कांग्रेस में थे, तब उन्हें सोनिया गांधी सीएम बनाना चाहती थीं, लेकिन राहुल गांधी एक कॉल से सब खत्म हो गया. सरमा ने एक पुराना किस्सा शेयर किया है, चलिए जानते हैं…

Shilpa Shrivastava
सोनिया गांधी ने CM के तौर पर मेरा साथ दिया, लेकिन राहुल ने दखल दिया: हिमंत सरमा ने किया खुलासा
Courtesy: Pinterest

नई दिल्ली: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने एक हैरान कर देने वाली पुरानी कहानी शेयर की है. उन्होंने कांग्रेस में अपने समय को लेकर कहा कि 2014 में, सोनिया गांधी ने उन्हें लगभग असम का मुख्यमंत्री बना ही दिया था, लेकिन उनके बेटे राहुल गांधी के एक कॉल की वजह से चीजें बदल गईं.

हिमंता ने बताया कि यह 2011 के राज्य चुनावों के बाद हुआ. उस समय कई कांग्रेस MLA उस समय के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई से खुश नहीं थे. उस समय कई लोगों ने हिमंता सरमा को सत्ता संभालने के लिए कहा था और सपोर्ट भी किया था. सरमा ने दावा किया कि 58 MLA साफ तौर पर उनके साथ थे. कुछ न्यूट्रल रहे और सिर्फ 12 ही चाहते थे कि गोगोई बने रहें.

मल्लिकार्जुन खड़गे भी पहुंचे थे असम:

कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे इस दौरान असम आए थे. खड़गे ने सारी बात का एनलाइज किया और पार्टी में दूसरों से कहा कि सरमा को MLA का असली सपोर्ट है. सरमा ने कहा कि सोनिया गांधी ने उन्हें अपने घर बुलाया. साथ ही CM के तौर पर उनके शपथ ग्रहण समारोह की तारीख चुनने के लिए भी कहा. उन्होंने इसके लिए जून 2014 में कामाख्या मंदिर में होने वाले अंबुबाची मेला फेस्टिवल के ठीक बाद का दिन चुना.

एक फोन कॉल से पलट गया सब:

इस दिन के बाद सब कुछ पलट गया. इस दौरान राहुल गांधी यूनाइटेड स्टेट्स में थे. पार्टी नेताओं को कुछ फोन कॉल किया गया और यह प्लान ड्रॉप हो गया. सरमा को CM बनाने का फैसला अचानक से कैंसिल कर दिया गया. इसके बाद सरमा ने 2014 में कांग्रेस कैबिनेट छोड़ दी और 2015 में पार्टी पूरी तरह छोड़ दी.

बीजेपी के तहत 2021 में बनें मुख्यमंत्री: 

इसके बाद वह BJP में शामिल हो गए और असम में उन्हें बड़ी जीत दिलाने में मदद की. 2021 में, वह BJP के तहत मुख्यमंत्री बने. इन सभी के बाद अब सरमा ने कहा कि वह शुक्रगुजार हैं कि ऐसा नहीं हुआ. उनका मानना ​​है कि भगवान ने उनके लिए बेहतर प्लान बनाया था. अगर वह कांग्रेस में रहते और वहां CM बन जाते, तो शायद वह असम की सेवा और सनातन धर्म (हिंदू परंपरा) की रक्षा उस तरह नहीं कर पाते जैसे वह अब कर रहे हैं.