Yashwant Varma Impeachment: जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू, कैश कांड में घिरे हैं जज

Yashwant Varma Impeachment: दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व जज यशवंत वर्मा के घर से जली हुई नकदी मिलने के बाद केंद्र सरकार ने उनके खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू कर दी है. 145 सांसदों द्वारा हस्ताक्षरित ज्ञापन के बाद संसद में महाभियोग का प्रस्ताव आगे बढ़ाया गया. सुप्रीम कोर्ट की इन-हाउस समिति की सिफारिशों के आधार पर यह कार्रवाई की जा रही है. अगर यह प्रक्रिया पूरी होती है, तो यह स्वतंत्र भारत में किसी हाईकोर्ट जज पर पहला महाभियोग होगा.

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Km Jaya

Yashwant Varma Impeachment: दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस यशवंत वर्मा, जिनके घर में जली हुई नकदी मिलने से देशभर में सनसनी फैल गई थी, अब महाभियोग की प्रक्रिया का सामना कर रहे हैं. सोमवार को 145 सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें वर्मा को पद से हटाने की मांग की गई है. इनमें भाजपा, कांग्रेस, माकपा, तेदेपा, जेडीयू और जेडीएस सहित विभिन्न दलों के सांसद शामिल हैं.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बीजेपी के पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की सुप्रिया सुले भी इस ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने वालों में शामिल हैं. यह देश के इतिहास में पहला अवसर है जब किसी उच्च न्यायालय के मौजूदा न्यायाधीश के खिलाफ महाभियोग की औपचारिक प्रक्रिया शुरू की गई है.

न्यायपालिका की निष्पक्षता पर सवाल 

मार्च 15 को दिल्ली स्थित न्यायमूर्ति वर्मा के बंगले में आग लगने के बाद दमकल कर्मियों ने वहां भारी मात्रा में जली हुई ₹500 की नकदी बरामद की थी. इस मामले ने न्यायपालिका की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए. वर्मा ने आरोपों को सिरे से नकारते हुए इसे "षड्यंत्र" करार दिया था और सुप्रीम कोर्ट की इन-हाउस समिति की रिपोर्ट को चुनौती दी थी.

न्यायाधीशों को हटाने की प्रक्रिया

भारत के संविधान में 'महाभियोग' शब्द का स्पष्ट उल्लेख नहीं है, लेकिन अनुच्छेद 124 और 218 के तहत उच्च न्यायालय एवं सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को हटाने की प्रक्रिया निर्धारित है. यह प्रक्रिया 'जजेस इन्क्वायरी एक्ट, 1968' के अंतर्गत संचालित होती है. महाभियोग प्रस्ताव को संसद के किसी भी सदन में पेश किया जा सकता है, जिसमें लोकसभा के लिए न्यूनतम 100 और राज्यसभा के लिए 50 सदस्यों के हस्ताक्षर आवश्यक होते हैं.

जांच के लिए गठित समिति 

इस मामले की जांच के लिए गठित समिति ने अपनी 64 पन्नों की रिपोर्ट में कहा कि जिस स्थान से नकदी बरामद हुई, उस पर न्यायमूर्ति वर्मा और उनके परिवार का नियंत्रण था. समिति की रिपोर्ट राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजी गई, जिसमें न्यायमूर्ति वर्मा को हटाने की सिफारिश की गई है.

दीपक मिश्रा के खिलाफ भी महाभियोग 

इससे पहले वर्ष 2018 में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ भी महाभियोग का प्रस्ताव लाया गया था, परंतु वह आगे नहीं बढ़ पाया. अगर यह प्रक्रिया पूरी होती है, तो स्वतंत्र भारत में यह पहला मौका होगा जब किसी हाईकोर्ट जज को महाभियोग के जरिये हटाया जाएगा.