IAF को समय से नहीं मिल पाएगा तेजस Mk1A, GE इंजन की वजह से हो रही प्रोजेक्ट में देरी
भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान का स्क्वाड्रन इस समय 32 है. इसकी संख्या 42 होने चाहिए थी. इसी साल मिग 21 बाइसन के दो बचे हुए स्क्वाड्रन चरणबद्ध तरीके से रिटायर हो जाएंगे. ऐसे में अगले साल यह संख्या घटकर 32 से 29 हो जाएगी. उधर तेजस Mk1A की डिलीवरी में भी समय लग सकता है क्योंकि इस विमान के लिए इंजन बनाने वाली अमेरिकी कंपनी इंजन की डिलीवरी में देरी कर रही है.
इंडियन एयरफोर्स के पास 42 फाइटर स्क्वाड्रन की अधिकृत ताकत है. लेकिन इस वक्त भारतीय वायुसेना के पास 32 लड़ाकू विमान हैं. इनमें से अधिकांश रूसी विमान हैं. इनमें से अधिकतर विमानों को अपग्रेड करने की आवश्यकता और कई तो रिटायरमेंट के कगार पर हैं. अगले साल यानी 2025 के अंत तक IAF में स्क्वाड्रन की संख्या घटकर मात्र 29 स्क्वाड्रन रह जाएगी. ऐसा इसलिए है क्योंकि मिग 21 बाइसन के दो बचे हुए स्क्वाड्रन चरणबद्ध तरीके से रिटायर जाएंगे. इस विमान को रिप्लेस करने वाला तेजस Mk1A - समय पर डिलीवर नहीं हो पाएगा. कारण है इसके इंजन में देरी.
सूत्रों के अनुसार तेजस Mk1A को बनाने वाली हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा इनकी देरी से डिलीवरी करने का कारण लड़ाकू विमानों को शक्ति प्रदान करने वाले जनरल इलेक्ट्रिक एफ404-आईएन20 इंजनों की आपूर्ति में कमी है. इस इंजन को अमेरिकी कंपनी जीई एयरोस्पेस बना रही है. इंजन सप्लाई करने में देर हो सकती है इसका असर पूरे प्रोजेक्ट पर पड़ेगा.
अगस्त 2021 में हुई थी जीई एयरोस्पेस की HAL की डील
अगस्त 2021 में HAL और अमेरिकी कंपनी जीई के बीच समझौते के अनुसार GE को इसी साल मार्च से इंजन की डिलीवरी शुरू करनी थी. उसे कुल 99 इंजन डिलीवर करने हैं. जीई को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 16 इंजन HAL को देने हैं. और HAL को हर वित्तीय वर्ष भारतीय वायुसेना को इतने ही तेजस Mk1A लड़ाकू विमान की डिलीवरी करनी है.
जीई एयरोस्पेस ने क्या कहा?
अमेरिकी इंजन निर्माता कंपनी JE एयरोस्पेस ने कहा कि वह तेजस Mk1A लड़ाकू विमान के लिए अपने एफ4ओ4 इंजन की आपूर्ति में देरी से संबंधित मुद्दों को ठीक करने के लिए हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के साथ काम कर रही है. कंपनी ने इसके लिए एयरोस्पेस उद्योग में आपूर्ति श्रृंखला की बाधाओं को जिम्मेदार ठहराया है.
10 महीने की हो सकती है देरी
F404 इंजन की डिलीवरी में लगभग 10 महीने की देरी होने से नए लड़ाकू विमान की डिलीवरी समय-सीमा पर सीधा असर पड़ेगा. जीई एयरोस्पेस का कहना है कि एयरोस्पेस इंडस्ट्री को आपूर्ति श्रृंखला पर अभूतपूर्व दबाव का सामना करना पड़ रहा है.
चिंतित है IAF?
इंडियन एयरफोर्स एलसीए एमके-1ए कार्यक्रम की वर्तमान गति को लेकर चिंतित है, क्योंकि नए लड़ाकू विमानों को शामिल करने में देरी से वायुसेना की लड़ाकू प्रभावशीलता क्षमता को खतरा हो सकता है. खतरे को देखते हुए इंडियन एयरफोर्स ने HAL के सामने ये मुद्दा उठाते हुए कहा कि 83 विमानों के लिए 48,000 करोड़ रुपये के अनुबंध को समय पर पूरा किया जाए.
HAL ने पहली डिलीवरी के लिए अगस्त का लक्ष्य रखा है जो समय से पांच महीने पहले हैं. कंपनी की ओर से कहा गया है कि HAL वित्तीय वर्ष 2024-25 में तय समय के अनुसार इनमें से 16 लड़ाकू विमानों को भारतीय वायुसेना को सौंप देगा. 2028-29 तक इंडियन एयरफोर्स को हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड सभी 83 विमानों की डिलीवरी करनी है.