रिकॉर्ड हाई से आधी हुई चांदी की कीमत, सोना भी धड़ाम; ETF निवेशक अब बेचें या फिर मैदान में डटे रहें?
सोना और चांदी की कीमतों में रिकॉर्ड ऊंचाई से भारी गिरावट दर्ज की गई है. चांदी की कीमत आधी रह गई है और सोने के दाम भी काफी कम हुए हैं. इससे ईटीएफ निवेशकों को बड़ा वित्तीय नुकसान झेलना पड़ा है.
नई दिल्ली: कमोडिटी बाजार में पिछले कुछ दिनों से हलचल मची हुई है. मल्टी कमोडिटी मार्केट (MCX) पर चांदी अपने रिकॉर्ड स्तर से टूटकर 2.25 लाख रुपये पर आ चुकी है. सोने के दाम में भी 51 हजार रुपये से ज्यादा की कमी देखी गई है. निवेशकों द्वारा की जा रही भारी बिकवाली ने बाजार को हिला दिया है. जो निवेशक फोमो के चक्कर में खरीदारी कर रहे थे, वे अब फंस गए हैं. विशेषज्ञों ने इस स्थिति में सावधानी बरतने की सलाह दी है.
सोमवार को MCX पर सोने का भाव 8000 रुपये गिरकर 1,39,599 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया. चांदी की स्थिति और भी खराब रही, जो 39,847 रुपये गिरकर 2.25 लाख रुपये के स्तर पर आ गई. चांदी का रिकॉर्ड स्तर 4.20 लाख रुपये था, जिससे यह अब 1.95 लाख रुपये सस्ती हो चुकी है. यह गिरावट पिछले 4 से 5 सत्रों के दौरान निवेशकों द्वारा की गई बिकवाली का नतीजा है.
ईटीएफ निवेशकों की बढ़ी मुसीबत
कीमतों में आई इस बड़ी गिरावट का असर गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ पर साफ दिख रहा है. सिल्वर ईटीएफ में पिछले दो दिनों से लोअर सर्किट लग रहा है. एक हफ्ते के भीतर सिल्वर ईटीएफ में 35 प्रतिशत तक की कमी आई है. गोल्ड ईटीएफ भी अछूता नहीं रहा और सोमवार को इसमें 8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई. ऊंचे दामों पर ईटीएफ खरीदने वाले निवेशकों की पूंजी अब काफी कम हो गई है और वे बाजार में फंस गए हैं.
कीमतों के गिरने के प्रमुख कारण
सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट के कई कारण बताए जा रहे हैं. अमेरिकी फेडरल रिजर्व में केविन वॉश की संभावित नियुक्ति ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया है. इसके अलावा, औद्योगिक क्षेत्रों से चांदी की मांग में कमी आई है. कमोडिटी मार्केट में शॉर्ट सेलिंग बढ़ने से भी कीमती धातुओं के दाम दबाव में हैं. इन तमाम कारणों ने मिलकर बाजार में बिकवाली के दबाव को बढ़ाया है, जिससे निवेशकों का भरोसा कम हुआ है और बाजार लगातार नीचे गिर रहा है.
बाजार के जानकारों का नजरिया
आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान बाजार स्थितियों को देखते हुए निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए. फोमो के चलते ऊंचे स्तर पर खरीदारी करने वाले निवेशकों को अब भारी घाटा उठाना पड़ रहा है. हालांकि, बाजार में बड़ी गिरावट के समय छोटी मात्रा में खरीदारी की जा सकती है. जानकारों के मुताबिक, निवेशकों को भावनाओं में बहने के बजाय बाजार के रुझानों का सही आकलन करने के बाद ही कोई बड़ा फैसला लेना चाहिए ताकि नुकसान कम हो सके.