नई दिल्ली: हाल ही में आयोजित NEET UG परीक्षा के रद्द होने के बाद प्रश्नपत्र लीक होने से कुछ सवाल उठे हैं. ऐसा क्यों होता है कि नीट परीक्षा पास आते ही NTA को पेपर रद्द करना पड़ता है. लेकिन JEE Main के साथ ऐसा बहुत कम होता है. इतनी सख्त सुरक्षा व्यवस्था के बाद भी अपराधी कैसे सेंध लगा लेते हैं. इसके पीछे कुछ प्रमुख कारण हैं. JEE Main जैसी बड़ी परीक्षाओं में ऐसी शिकायतें बहुत कम होती हैं? विशेषज्ञों का मानना है कि इसका मुख्य कारण दोनों परीक्षाओं के अलग-अलग परीक्षा पैटर्न और मैनेजमेंट हैं.
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित नीट यूजी परीक्षा अभी भी पेन-एंड-पेपर मोड में ही हो रही है. इसका मतलब है कि लाखों प्रश्न पत्रों को प्रिंट करना, विभिन्न शहरों में भेजना और सुरक्षित रखना पड़ता है. इस प्रक्रिया में कई ऐसे चरण हैं जहां प्रश्न पत्र लीक होने का खतरा बढ़ जाता है. प्रश्न पत्र भंडारण, परिवहन और परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने के दौरान कई लोगों के संपर्क में आते हैं.
दूसरी ओर, जेईई मेन पूरी तरह से कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) है. प्रश्न पत्र सुरक्षित एन्क्रिप्टेड सर्वरों पर रखे जाते हैं और परीक्षा शुरू होने से कुछ ही मिनट पहले डिजिटल रूप से खोले जाते हैं, जिससे प्रश्न पत्र को पहले से चुराना या लीक करना बहुत मुश्किल हो जाता है.
NEET UG परीक्षा पूरे देश में एक ही दिन आयोजित की जाती है और सभी जगह एक ही प्रश्न पत्र का प्रयोग होता है. इसका मतलब है कि अगर किसी एक केंद्र पर भी प्रश्न पत्र लीक हो जाता है, तो पूरी परीक्षा प्रभावित होती है. इसके विपरीत, JEE Main परीक्षा कई दिनों तक और कई शिफ्टों में आयोजित की जाती है, जिसमें प्रत्येक शिफ्ट में अलग-अलग प्रश्न होते हैं. इसलिए, यदि किसी एक केंद्र पर कोई समस्या होती है, तो भी पूरी परीक्षा प्रभावित नहीं होती है.
NEET UG के लिए लगभग 4,700 से 5,000 केंद्र स्थापित किए जाते हैं, जिनमें से अधिकांश नियमित स्कूलों और कॉलेजों में होते हैं, जहां सुरक्षा व्यवस्था हर जगह एक जैसी नहीं होती. वहीं, JEE Main सीमित और विशेष डिजिटल केंद्रों पर आयोजित की जाती है, जहां उच्च गुणवत्ता वाले सीसीटीवी, बायोमेट्रिक सिस्टम और नेटवर्क निगरानी जैसी बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होती हैं.
NEET UG ऑफलाइन (OMR शीट) है, इसमें भौतिक पेपर का उपयोग होता है, यह एक ही दिन आयोजित किया जाता है, सभी के लिए प्रश्न सेट समान होता है, इसके 4,700-5,000 केंद्र होते हैं और स्थानीय निगरानी होती है. JEE Main ऑनलाइन (CBT) है, इसमें डिजिटल सर्वर का उपयोग होता है, यह कई दिनों और शिफ्टों में आयोजित किया जाता है, प्रत्येक शिफ्ट में प्रश्न अलग-अलग होते हैं, इसके लगभग 600 केंद्र होते हैं और केंद्रीकृत डिजिटल निगरानी होती है.
बार-बार हुए विवादों के बाद, अब NEET UG को ऑनलाइन या JEE Main की तरह हाइब्रिड मोड में आयोजित करने की चर्चा चल रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि कंप्यूटर आधारित परीक्षा अपनाने से पेपर लीक होने की संभावना काफी कम हो सकती है. हालांकि, ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल बुनियादी ढांचे, इंटरनेट कनेक्टिविटी और कंप्यूटर सुविधाओं की कमी जैसी कई चुनौतियां हैं. साथ ही, चूंकि हर साल 20 लाख से अधिक छात्र NEET परीक्षा देते हैं, इसलिए इतनी बड़ी ऑनलाइन परीक्षा का आयोजन करना आसान नहीं होगा.