अडानी समूह ने हिंडनबर्ग रिसर्च के नए आरोपों को खारिज कर दिया है. अडानी समूह ने इसे दुर्भावनापूर्ण, शरारती और चालाकीपूर्ण बताया है. हिंडनबर्ग की ताजा रिपोर्ट में मार्केट रेग्युलेटर सेबी पर निशाना साधते हुए गंभीर आरोप लगाए गए हैं. दावा किया कि व्हिसलब्लोअर दस्तावेजों से पता चलता है कि सेबी की चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच की अडानी मनी साइफनिंग स्कैंडल में इस्तेमाल की गई अस्पष्ट ऑफशोर संस्थाओं में हिस्सेदारी थी. रविवार को एक बयान में अडानी समूह ने कहा कि आरोप बदनाम करने का साजिश है.
अडानी समूह ने इन दावों को दुर्भावनापूर्ण बताया और उनकी पारदर्शिता और विनियामक अनुपालन पर जोर दिया. बुच और उनके पति ने भी आरोपों का खंडन किया और अपने वित्तीय दस्तावेजों की पूरी पारदर्शिता की पेशकश की. अडानी समूह ने कहा कि हम समूह के खिलाफ हिंडनबर्ग द्वारा लगाए गए इन सभी आरोपों को पूरी तरह से खारिज करते हैं, जो सिर्फ हमें बदनाम करने वाले दावों की रि-साइक्लिंग है. अपने बयान में अडानी समूह ने हिंडनबर्ग की रिपोर्ट को उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का एक सुनियोजित जानबूझकर किया गया प्रयास बताया.
Adani Group issues a statement on the latest report from Hindenberg Research.
The latest allegations by Hindenburg are malicious, mischievous and manipulative selections of publicly available information to arrive at pre-determined conclusions for personal profiteering with… pic.twitter.com/WwKbPLTkrv— ANI (@ANI) August 11, 2024Also Read
अडानी समूह ने अपने बयान में कहा कि हम अडानी समूह के खिलाफ इन आरोपों को पूरी तरह से खारिज करते हैं जो बदनाम दावों को दोहराने की कोशिश है. पहले लगाए गए सभी आरोपों जिनकी पूरी तरह से जांच की गई निराधार साबित हुए हैं और जनवरी 2024 में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पहले ही खारिज कर दिए गए हैं.
हिंडनबर्ग रिसर्च ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया कि सेबी की चेयरपर्सन और उनके पति ने विनोद अडानी द्वारा इस्तेमाल किए गए उन्हीं अस्पष्ट ऑफशोर बरमूडा और मॉरीशस फंडों में हिस्सेदारी छिपाई थी. व्हिसलब्लोअर से मिले दस्तावेजों से पता चलता है जिन ऑफशोर संस्थाओं का इस्तेमाल अडानी मनी साइफनिंग स्कैंडल में हुआ, उसमें SEBI अध्यक्ष की हिस्सेदारी थी.
हिंडनबर्ग रिसर्च के मुताबिक, 22 मार्च 2017 को को माधबी पुरी बुच की नियुक्ति से कुछ ही सप्ताह पहले, उनके पति धवल बुच ने मॉरीशस के फंड प्रशासक ट्राइडेंट ट्रस्ट को एक चिट्ठी लिखी. हिंडनबर्ग रिसर्च के मुताबिक, जैसा कि हमें एक व्हिसलब्लोअर से मिले डॉक्यूमेंट्स दस्तावेजों से पता चलता है. ये ईमेल उनके और उनकी पत्नी के ग्लोबल डायनेमिक ऑपर्च्युनिटीज फंड में निवेश के बारे में था. चिट्ठी में धवल बुच ने अनुरोध किया था कि वे बैंक अकाउंट्स को संचालित करने के लिए एकमात्र अधिकृत व्यक्ति बनें, जिससे राजनीतिक रूप से संवेदनशील नियुक्ति से पहले उनकी पत्नी के नाम से संपत्ति ट्रांसफर हो सके. अप्रैल 2017 से मार्च 2022 तक माधबी पुरी के पास एक ऑफशोर सिंगापुरी कंसल्टिंग फर्म में 100% हिस्सेदारी थी, जिसे अगोरा पार्टनर्स कहा जाता था.
मार्च 2022 को सेबी अध्यक्ष के रूप में उनकी नियुक्ति के दो सप्ताह बाद, उन्होंने चुपचाप अपने पति को शेयर ट्रांसफर कर दिए. 27 मार्च 2013 को अगोरा पार्टनर्स प्राइवेट लिमिटेड को सिंगापुर में रजिस्टर्ड किया गया था. सिंगापुर डायरेक्टर सर्च के अनुसार, अगोरा प्राइवेट लिमिटेड खुद को बिजनेस और मैनेजमेंट कंसल्टेंट के रूप में बताता है. उस समय, कंपनी के 2014 सालाना रिटर्न के अनुसार, माधबी बुच को 100% शेयरधारक के रूप में प्रकट किया गया था. सिंगापुर के रिकॉर्ड के अनुसार, बुच 16 मार्च 2022 तक अगोरा पार्टनर्स की 100% शेयरधारक बनी रहीं. माधबी बुच के पास वर्तमान में अगोरा एडवाइजरी नाम की एक भारतीय परामर्श व्यवसाय में 99% हिस्सेदारी है, जहां उनके पति धवल बुच डायरेक्टर हैं.