नई दिल्ली: बिहार में हो रही जातीय गणना पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दलील देते हुए कहा कि राज्य में जातीय गणना के सर्वे का काम पूरा हो चुका है. सर्वे का डाटा सार्वजनिक ना किए जाने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट सोमवार 21 अगस्त को सुनवाई करेगा. सुप्रीम कोर्ट 21 अगस्त को यह तय कर सकता है कि जातीय गणना के आंकड़ों को जारी करने पर अंतरिम रोक लगे या नहीं.
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान बिहार सरकार के वकील ने दलील देते हुए कहा कि जातीय गणना का सर्वे 6 अगस्त तक पूरा हो गया है. इसे 12 अगस्त को इसकी सूचना वेबसाइट पर अपलोड भी कर दी गई है हालांकि बिहार सरकार ने कहा कि वो अभी डाटा सार्वजनिक नहीं करने जा रही है.
याचिकाकर्ताओं ने जातिगत सर्वे का डाटा सार्वजनिक करने पर रोक लगाने की मांग की तो जस्टिस खन्ना ने कहा कि वैसे भी संकलित किए निजी आंकड़े कभी सार्वजनिक नहीं होते. आंकड़ों का विश्लेषण ही जारी किया जाता है.
बीते दिनों सुप्रीम कोर्ट ने जातीय गणना को लेकर पटना हाईकोर्ट के फैसला पर रोक लगाने से साफ तौर पर इंकार कर दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा था कि जाति आधारित गणना का काम 80 प्रतिशत पूरा हो चुका है. अगर यह 90 प्रतिशत भी हो जाएगा तो क्या फर्क पड़ेगा.
सरकार ने दिया था आदेश
एक अगस्त को पटना हाई कोर्ट ने जातीय जनगणना को चुनौती देने वाली सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया था.हाई कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा था कि सरकार चाहे तो गणना करा सकती है. इसके बाद बिहार की नीतीश सरकार ने जातीय जनगणना को लेकर आदेश जारी कर दिया था. सरकार ने सभी जिला अधिकारियों को निर्देश दिया था कि उच्च न्यायालय के फैसले के आलोक में बचा हुआ काम पूरा करें. जिसके बाद अब बिहार सरकार ने जातीय जनगणना का डाटा तैयार कर लिया है.