नई दिल्ली: राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को लेकर कड़ा रुख अपनाया. पीएम मोदी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधा.
उनका आरोप था कि टीएमसी सत्ता बचाने के लिए अवैध घुसपैठियों का पक्ष ले रही है. यह टिप्पणी उस समय आई, जब एक दिन पहले ही ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे.
प्रधानमंत्री मोदी ने तृणमूल सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में गिरावट के नए रिकॉर्ड बन रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य की सरकार को जनता के भविष्य की नहीं, सिर्फ सत्ता की चिंता है. प्रधानमंत्री के अनुसार, जिन लोगों के सपने अंधकार में जा रहे हैं, उनकी आवाज सुनने वाला कोई नहीं है.
हमारे टीएमसी के साथियों ने काफी कुछ कहा, जरा खुद तो अपनी गिरेबान में देखें।
निर्मम सरकार पतन के जितने भी पैरामीटर्स हैं, उसमें नए-नए रिकॉर्ड बनाती जा रही है, और उनके नेता यहां उपदेश दे रहे हैं।
ऐसी निर्मम सरकार के कारण वहां (पश्चिम बंगाल) के लोगों का भविष्य अंधकार में डूब रहा…— BJP (@BJP4India) February 5, 2026Also Read
एक दिन पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में एसआईआर प्रक्रिया का विरोध किया था. उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव से पहले यह कवायद गैर बीजेपी शासित राज्य को निशाना बनाने के लिए की जा रही है. इसी संदर्भ में प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ राजनीतिक दल अदालतों में जाकर अवैध घुसपैठियों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं.
प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया के कई समृद्ध देश अवैध प्रवासियों को बाहर निकाल रहे हैं, जबकि भारत में कुछ समूह संगठित तरीके से उनका समर्थन कर रहे हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि देश का युवा ऐसे नेताओं को कैसे स्वीकार कर सकता है, जो खुले तौर पर घुसपैठियों की पैरवी करते हैं.
पीएम मोदी ने दावा किया कि अवैध घुसपैठिए युवाओं के रोजगार छीन रहे हैं और आदिवासी समुदायों की जमीन पर कब्जा कर रहे हैं. उनके मुताबिक, इससे न सिर्फ आजीविका, बल्कि देश के बेटों और बेटियों की सुरक्षा पर भी खतरा पैदा हो रहा है. यही मुद्दा भाजपा बंगाल चुनाव से पहले जोर-शोर से उठा रही है.
प्रधानमंत्री ने कांग्रेस, तृणमूल, डीएमके और वाम दलों पर भी हमला बोला. उन्होंने कहा कि इन दलों को केंद्र और राज्यों में लंबे समय तक सत्ता मिली, लेकिन जनता के जीवन में बदलाव के बजाय उन्होंने अपनी तिजोरियां भरने को प्राथमिकता दी.