एक्सीडेंट के बाद मौके से भागे तो बढ़ेगी मुश्किल! जानिए Hit and Run केस में लगती है कौन-सी धारा

गुरुग्राम में महिला बाइकर को कार ने टक्कर मारी और चालक मौके से चला गया. ऐसे मामलों में भारतीय न्याय संहिता की धारा 106 के प्रावधान चर्चा में हैं. जानिए कब कौन सी सजा लागू होती है.

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Meenu Singh

इन दिनों गुरुग्राम का एक केस हिट एंड रन केस काफी चर्चा का विषय बना हुआ है. ये घटना गुरुग्राम की एक महिला बाइकर के साथ हुई. गोल्फ कोर्स रोड पर महिला बाइकर के साथ हुए हादसे ने हिट एंड रन के कानूनी प्रावधानों को फिर चर्चा में ला दिया है.

रविवार को एक कार ने उसकी स्पोर्ट्स बाइक को टक्कर मार दी, जिसके बाद बाइक कई मीटर तक सड़क पर घिसटती चली गई. आरोप है कि कार में मौजूद लोग हादसे के बाद वहां से निकल गए. इस घटना के बीच भारतीय न्याय संहिता की धारा 106 और हिट एंड रन से जुड़े नियमों को समझना जरूरी है.

हिट एंड रन पर कौन सी धारा लागू होती है?

भारतीय न्याय संहिता 2023 में लापरवाही या असावधानी के कारण किसी व्यक्ति की मौत होने से जुड़े मामलों के लिए धारा 106 है. पुराने कानून में ऐसे मामलों को सामान्य तौर पर IPC की धारा 304A के तहत देखा जाता था. नए कानून में जानलेवा हादसे के बाद घटनास्थल से भागने की स्थिति को लेकर ज्यादा सख्त प्रावधान किया गया है. हालांकि, केवल चोट लगने या मौत न होने पर 10 साल वाला प्रावधान अपने आप लागू नहीं होता.


धारा 106 (1) में क्या सजा है?

धारा 106 (1) उस स्थिति से जुड़ी है, जब किसी व्यक्ति की मौत लापरवाही या असावधानी के कारण होती है और मामला गैर-इरादतन हत्या की श्रेणी में नहीं आता. इसमें पांच साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है. किसी दुर्घटना में चालक का व्यवहार भी अहम होता है. हादसे के बाद घायल व्यक्ति की मदद करना और पुलिस या संबंधित अधिकारी को सूचना देना कानूनी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण हो सकता है.

धारा 106 (2) में कितना सख्त प्रावधान?

धारा 106 (2) में उस स्थिति का जिक्र है, जब लापरवाही से वाहन चलाने के कारण किसी व्यक्ति की मौत हो और चालक घटना की जानकारी पुलिस अधिकारी या मजिस्ट्रेट को दिए बिना वहां से चला जाए. इसमें 10 साल तक की कैद और जुर्माने का प्रावधान है. हालांकि, इस प्रावधान को लेकर ट्रक, बस और कमर्शियल वाहन चालकों ने विरोध किया था. इसके बाद केंद्र ने इसे लागू करने का काम रोकने की घोषणा की थी.

हादसे के बाद चालक को क्या करना चाहिए?

दुर्घटना होने पर चालक को सुरक्षित स्थान पर रुककर घायल लोगों की मदद करनी चाहिए और पुलिस या संबंधित अधिकारी को सूचना देनी चाहिए. किसी मामले में आरोप तय करते समय मौत या चोट, ड्राइविंग का तरीका, हादसे की परिस्थितियां और दुर्घटना के बाद चालक के व्यवहार को देखा जाता है. नए कानून में खास अंतर यह है कि जानलेवा हादसे के बाद रुकने और सूचना देने वाले चालक तथा मौके से भागने वाले चालक के व्यवहार को अलग नजर से देखा गया है.