नई दिल्ली: डिजिटल इंडिया के इस दौर में साइबर ठगों ने आम जनता की गाढ़ी कमाई को लूटने का जो जाल बिछाया था, उस पर गुजरात पुलिस ने अब तक की सबसे बड़ी चोट की है. राज्य सरकार के नेतृत्व और गृह विभाग की निगरानी में पुलिस ने एक व्यापक अभियान चलाकर अपराधियों के पूरे तंत्र को हिलाकर रख दिया है.
इस पूरे खोजी अभियान का मुख्य फोकस उन फर्जी बैंक खातों (म्यूल अकाउंट्स) को बंद करना था, जिनका उपयोग अपराधी पैसे छुपाने और मनी लॉन्ड्रिंग के लिए करते थे. इन संदिग्ध खातों की पहचान के लिए राज्य के सभी साइबर पुलिस स्टेशनों, लोकल क्राइम ब्रांच और इंटेलिजेंस यूनिट को एक साथ जोड़ा गया. पुलिस ने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल और 1930 हेल्पलाइन से मिले खुफिया डेटा का बेहद बारीकी से विश्लेषण कर इस पूरे गिरोह की जड़ों को खोज निकाला.
पुलिस की इस सघन छापेमारी के दौरान रिकॉर्ड 565 एफआईआर दर्ज की गईं और देश के अलग-अलग हिस्सों से 638 शातिर अपराधियों को सलाखों के पीछे भेजा गया. जांच में कुल 193 एक्टिव म्यूल अकाउंट्स को पूरी तरह फ्रीज कर दिया गया है. इस बड़े ऑपरेशन के दौरान लगभग 4052 साइबर अपराध के मामलों की कड़ियां आपस में जुड़ी पाई गईं, जिनमें से 491 मामलों का सीधा कनेक्शन गुजरात राज्य की सीमाओं से था.
पुलिस प्रशासन की इस सख्त चौतरफा कार्रवाई का सीधा और सकारात्मक असर बैंकिंग प्रणाली पर भी साफ देखने को मिला है. आंकड़ों के मुताबिक, संदिग्ध खातों से चेक के जरिए होने वाली नकदी निकासी में अचानक 75 प्रतिशत से ज्यादा की भारी कमी आई है. इसके अलावा, साल 2025 के आखिरी महीनों में एटीएम के माध्यम से होने वाली अवैध नकद निकासी में भी लगभग 66 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे अपराधियों की कमर टूट गई.
भविष्य में इस तरह के अपराधों को रोकने के लिए अब रिजर्व बैंक के मार्गदर्शन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सुरक्षा प्रणाली को लागू किया जा रहा है. इसके तहत हर एक डिजिटल ट्रांजैक्शन की रिस्क स्कोरिंग की जाएगी ताकि संदिग्ध लेन-देन को तुरंत रोका जा सके. साथ ही, 'Mulehunter.ai' नाम से एक आधुनिक डिजिटल रजिस्ट्री भी बनाई गई है, जो सभी बैंकों को आपस में रियल-टाइम डेटा साझा करने और अपराधियों को तुरंत पकड़ने में मदद करेगी.