आजादी के दिन गुजरात के बन्नी घास के मैदानों में लौटी रौनक, खुले आसमान में छोड़े गए 20 काले हिरण
गुजरात के बन्नी घास के मैदानों में स्वतंत्रता दिवस पर 20 ब्लैकबक छोड़े गए. पहल का लक्ष्य स्थानीय शाकाहारी वन्यजीवों की आबादी बढ़ाना और घासभूमि पारिस्थितिकी को मजबूत करना है.
गुजरात के बन्नी घास के मैदानों में रविवार को 20 ब्लैकबक यानी काले हिरणों को उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया. यह पहल स्थानीय शाकाहारी वन्यजीवों की आबादी को फिर से मजबूत करने और भारत के महत्वपूर्ण घासभूमि पारिस्थितिकी तंत्र को बेहतर बनाने के उद्देश्य से की गई. गुजरात वन विभाग ने यह काम Greens Zoological Rescue and Rehabilitation Centre (GZRRC), Vantara के तकनीकी सहयोग से पूरा किया.
सिर्फ संख्या बढ़ाना नहीं, पारिस्थितिकी बहाल करना लक्ष्य
अधिकारियों के मुताबिक इस अभियान का उद्देश्य केवल बन्नी में ब्लैकबक की संख्या बढ़ाना नहीं है. इसके जरिए घासमैदान की मूल शाकाहारी वन्यजीव आबादी को दोबारा मजबूत करने की कोशिश की जा रही है. ब्लैकबक के अलावा चीतल जैसे कुछ अन्य स्थानीय जीवों के साथ चिंककारा, नीलगाय और जंगली सूअर भी इस क्षेत्र की पारंपरिक शाकाहारी आबादी का हिस्सा रहे हैं.
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स्वस्थ घासभूमि के लिए जरूरी हैं शाकाहारी जीव
गुजरात के Chief Wildlife Warden डॉ. जयपाल सिंह ने कहा कि स्थानीय वन्यजीवों की बहाली स्वस्थ प्राकृतिक परिदृश्य के लिए महत्वपूर्ण है. उन्होंने इसे बन्नी की जैव विविधता और पारिस्थितिक स्वरूप को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम बताया. संरक्षण विशेषज्ञों का मानना है कि पर्याप्त शाकाहारी आबादी प्राकृतिक खाद्य शृंखला और शिकारी-शिकार संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.
गुजरात में बड़े स्तर पर चल रहा कार्यक्रम
यह पहल गुजरात में स्थानीय शाकाहारी प्रजातियों के संरक्षण और स्थानांतरण के व्यापक कार्यक्रम का हिस्सा है. केंद्र सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने राज्य में 500 ब्लैकबक और 100 चिंककारा के स्थानांतरण को मंजूरी दी है. कार्यक्रम के कुछ हिस्सों का संबंध चीता पुनर्वास योजना के तहत शिकार प्रजातियों की संख्या बढ़ाने से भी है, लेकिन बन्नी में ब्लैकबक छोड़ने का मुख्य उद्देश्य स्थानीय जैव विविधता को बहाल करना है.
वनतारा देगा तकनीकी सहयोग
बन्नी ग्रासलैंड फॉरेस्ट डिवीजन ने व्यापक स्थानांतरण अभियान के लिए Vantara से तकनीकी सहायता मांगी है. इसमें विशेष परिवहन वाहन, पोर्टेबल बाड़े, पशु चिकित्सा विशेषज्ञता और वन्यजीवों की सुरक्षित देखभाल शामिल है. अधिकारियों के अनुसार सिर्फ जानवरों को छोड़ना पर्याप्त नहीं होगा. इनके आवास, स्वास्थ्य, आबादी की योजना और स्थानीय समुदायों की भागीदारी के साथ लंबे समय तक निगरानी करना इस संरक्षण अभियान की सफलता के लिए जरूरी होगा.