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India Daily

'बयानों में दिखती है विभाजनकारी प्रवृत्ति', गुवाहाटी हाई कोर्ट ने हेट स्पीच केस में असम के CM हिमंत बिस्वा सरमा को जारी किया नोटिस

गुवाहाटी हाई कोर्ट ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को मुस्लिम समुदाय के खिलाफ बार-बार नफरती भाषण देने के आरोपों पर नोटिस जारी किया है. कोर्ट ने उनके बयानों को 'विभाजनकारी' बताते हुए राज्य और केंद्र सरकार से भी जवाब मांगा है.

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'बयानों में दिखती है विभाजनकारी प्रवृत्ति', गुवाहाटी हाई कोर्ट ने हेट स्पीच केस में असम के CM हिमंत बिस्वा सरमा को जारी किया नोटिस
Courtesy: Social Media

नई दिल्ली: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की बयानबाजी अब कानूनी जांच के घेरे में आ गई है. गुरुवार को गुवाहाटी हाई कोर्ट ने मुख्यमंत्री को एक औपचारिक नोटिस जारी कर उनके खिलाफ दायर याचिकाओं पर जवाब मांगा है. मुख्य न्यायाधीश आशुतोष कुमार और न्यायमूर्ति अरुण देव चौधरी की खंडपीठ ने याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सरमा के साथ-साथ केंद्र और असम सरकार को भी प्रतिवादी बनाया है.

सुनवाई के दौरान अदालत ने मुख्यमंत्री के बयानों पर गंभीर चिंता व्यक्त की. खंडपीठ ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि असम के मुख्यमंत्री के भाषणों में विभाजनकारी प्रवृत्ति दिखाई देती है. 'बार एंड बेंच' की रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा- प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया जाता है, प्रतिवादी संख्या 3 (हिमंत सरमा) को भी नोटिस जारी किया जाए.' इस मामले की अगली सुनवाई अब अप्रैल के महीने में निर्धारित की गई है.

'मिया' शब्द और 'नो मर्सी' वीडियो पर विवाद 

मुख्यमंत्री के खिलाफ दायर याचिकाओं में उन पर नफरत फैलाने और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण करने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि सरमा जानबूझकर मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाने के लिए 'मिया' जैसे शब्दों का अपमानजनक संदर्भ में इस्तेमाल करते हैं. याचिकाओं में बीजेपी असम इकाई द्वारा साझा किए गए एक विवादास्पद वीडियो का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें मुख्यमंत्री को दो मुस्लिम व्यक्तियों की एनिमेटेड छवियों की ओर गोली चलाते हुए दिखाया गया है. इस वीडियो में 'पॉइंट ब्लैंक शॉट' और 'नो मर्सी' (कोई दया नहीं) जैसे उग्र नारों का प्रयोग किया गया था.

सुप्रीम कोर्ट से हाई कोर्ट तक पहुंचा मामला 

इससे पहले याचिकाकर्ता सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे, लेकिन शीर्ष अदालत ने सीधे हस्तक्षेप करने से मना कर दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अदालतों का राजनीतिक युद्ध का मैदान बनना एक चिंताजनक प्रवृत्ति है. इसके बाद मामले को गुवाहाटी हाई कोर्ट भेज दिया गया. याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने सरमा को अभ्यस्त अपराधी करार देते हुए कहा कि उनके जहरीले नफरती अभियान से पूरा देश प्रभावित हो रहा है. सीपीआई (एम) और सीपीआई नेता एनी राजा ने मांग की है कि इस मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया जाए, क्योंकि राज्य की एजेंसियों से निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं की जा सकती.