IPL 2026

'मर्दों को भी है बराबरी का हक,' गैंगरेप के झूठे केस में फंसाया तो हाई कोर्ट ने लगाई महिला याचिकाकर्ता को लताड़

False Misdeed Case: गैंगरेप से जुड़े एक मुकदमे की सुनवाई करते हुए दिल्ली की एक कोर्ट ने आरोपों को झूठा पाया. इसके बाद कोर्ट ने मामले में महिला याचिकाकर्ता को लताड़ भी लगाई. कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि मर्दों को भी महिलाओं की तरह ही बराबरी का हक है. हमारे देश में पुरुषों को भी समान अधिकार दिए गए हैं. आइए, जानते हैं कि आखिर पूरा मामला क्या है.

Social Media
India Daily Live

False Misdeed Case: दिल्ली की एक कोर्ट ने हाल ही में एक मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि एक शख्स के खिलाफ रेप का झूठा आरोप लगाया गया था. कोर्ट ने पुलिस को महिला याचिकाकर्ता के खिलाफ कानूनी कार्यवाही शुरू करने का निर्देश पुलिस को दिया. अदालत ने इस दौरान ये भी कहा कि कानून के तहत महिलाओं को कुछ विशेषाधिकार दिए गए हैं, लेकिन इसका ये मतलब नहीं है कि वे इसका उपयोग किसी के खिलाफ व्यक्तिगत तौर पर करे. कोर्ट ने कहा कि इस तरह के झूठे आरोपों से आरोपी की लाइफ, उसकी प्रतिष्ठा पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है.

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, 14 जुलाई को एक शख्स के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी और उसे गिरफ्तार किया गया था. इसके बाद आरोपी की ओर से जमानत के लिए याचिका दायर की गई थी. जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि शख्स के खिलाफ लगाए गए आरोप झूठे हैं. 

कोर्ट की टिप्पणी के एक दिन बाद ही शिकायतकर्ता महिला ने कहा कि वो स्वेच्छा से आरोपी के साथ एक होटल में गई थी और सहमति से शारीरिक संबंध बनाए थे. महिला ने खुलासा किया कि उसने आरोपी से असहमति के बाद गुस्से में आकर बलात्कार के झूठे आरोप लगाए थे.

कोर्ट ने सुनवाई के दौरान और क्या कहा?

अदालत ने कहा कि जबकि महिलाओं को कानून के तहत विशेष विशेषाधिकार और सुरक्षा दी जाती है, इन प्रावधानों का गलत मकसद के तहत यूज नहीं करना चाहिए. कोर्ट ने ये भी कहा कि इस तरह की प्रवृति लगातार बढ़ रही है. कोर्ट ने कहा कि इस तरह के झूठे आरोपों से किसी का जीवन बर्बाद हो जाता है. उसका और उसके परिवार के सदस्यों की प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुंचता है.

कोर्ट ने कहा कि हमारे देश के पुरुषों को संविधान में निहित कानून के तहत समान अधिकार और सुरक्षा प्राप्त है, हालांकि, महिलाओं को विशेष विशेषाधिकार दिया गया है. लेकिन इस विशेष विशेषाधिकार और महिला-सुरक्षा कानूनों को बदला लेने या समाज में व्याप्त गुप्त उद्देश्यों को पूरा करने के लिए तलवार नहीं बनाया जाना चाहिए.

कोर्ट ने माना- कुछ मामलों में कानून का दुरुपयोग

कोर्ट ने बलात्कार की गंभीरता और दर्दनाक प्रकृति को स्वीकार किया, लेकिन यह भी माना कि कुछ मामलों में बलात्कार के खिलाफ कानून का दुरुपयोग किया जा रहा है. इसने इस बात पर प्रकाश डाला कि आपराधिक शिकायत दर्ज करने का उपयोग गुप्त उद्देश्यों को प्राप्त करने या आरोपी को सबक सिखाने के साधन के रूप में नहीं किया जाना चाहिए.

कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को गुस्से में और नशे में झूठी शिकायत करने के लिए शिकायतकर्ता के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश दिया, जिसके कारण आरोपी को 10 दिन जेल में गुजारना पड़ा. इसने पुलिस को उन मामलों में आरोपी व्यक्तियों को गिरफ्तार करते समय सावधानी बरतने की भी सलाह दी, जहां परिस्थितियों के कारण प्रारंभिक जांच या जांच की आवश्यकता होती है, क्योंकि कोई भी मुआवजा किसी निर्दोष व्यक्ति को झूठी शिकायत के आधार पर कारावास के लिए पर्याप्त रूप से क्षतिपूर्ति नहीं कर सकता है.