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India Daily

दो वोटर आईडी रखने पर सवाल, पवन खेड़ा की पत्नी को मिला चुनाव आयोग का नोटिस

नोटिस में कहा गया है मेरे संज्ञान में लाया गया है कि आपने एक से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता सूची में अपना नाम पंजीकृत करा लिया है. जैसा कि आप जानते होंगे कि एक से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता सूची में पंजीकृत होना जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के तहत दंडनीय अपराध है.

Gyanendra Sharma
दो वोटर आईडी रखने पर सवाल, पवन खेड़ा की पत्नी को मिला चुनाव आयोग का नोटिस
Courtesy: Social Media

Election Commission: चुनाव अधिकारियों ने गुरुवार को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की पत्नी के. नीलिमा को एक नोटिस जारी किया जिसमें शिकायत की गई थी कि उनका नाम एक से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता सूची में है जिनमें तेलंगाना का एक निर्वाचन क्षेत्र भी शामिल है.

यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब दो दिन पहले ही चुनाव आयोग ने पवन खेड़ा को नई दिल्ली और जंगपुरा विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूचियों में कथित तौर पर नाम होने के लिए नोटिस जारी किया था. खेड़ा की पत्नी को भेजे गए नोटिस में कहा गया है कि वह न केवल नई दिल्ली निर्वाचन क्षेत्र में, बल्कि तेलंगाना के खैरताबाद में भी मतदाता के रूप में पंजीकृत हैं. नीलिमा को नोटिस का जवाब देने के लिए 10 सितंबर तक का समय दिया गया है.

नोटिस में क्या कहा गया?

नोटिस में कहा गया है, "मेरे संज्ञान में लाया गया है कि आपने एक से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता सूची में अपना नाम पंजीकृत करा लिया है. जैसा कि आप जानते होंगे कि एक से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता सूची में पंजीकृत होना जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के तहत दंडनीय अपराध है. इसलिए आपको निर्देश दिया जाता है कि आप कारण बताएं कि उक्त अधिनियम के तहत आपके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए."

नीलिमा के खिलाफ शिकायत

भाजपा ने बुधवार को आरोप लगाया कि खेड़ा की पत्नी जो कांग्रेस नेता भी हैं के पास दो सक्रिय मतदाता पहचान पत्र हैं और कहा कि पार्टी नेता राहुल गांधी अपने ही अपने ही नेताओं के बीच इस तरह के आपराधिक कृत्यों से खुद को मुक्त नहीं कर सकते. नीलिमा के खिलाफ शिकायत भाजपा नेता संकेत गुप्ता ने शपथ पत्र पर दर्ज कराई थी.

नोटिस पर प्रतिक्रिया देते हुए पवन खेड़ा ने चुनाव आयोग पर निशाना साधा और उस पर सत्तारूढ़ सरकार के पक्ष में पक्षपात करने का आरोप लगाया. उन्होंने लिखा, यह इस बात की एक और पुष्टि है कि चुनाव आयोग सत्तारूढ़ सरकार के समर्थन में कैसे काम करता है.