नई दिल्ली: ED ने विंज़ो गेम्स प्राइवेट लिमिटेड की निदेशकों सौम्या सिंह राठौर और पवन नंदा को बुधवार को गिरफ्तार कर कोर्ट मे पेश किया गया. अदालत ने उन्हें ED की हिरासत में दे दिया है. ED द्वारा दायर रिमांड मामले पर बहस के लिए आज (गुरुवार) सुबह 11:30 बजे पेश करने का आदेश दिया है. यह कार्रवाई हाल ही में ईडी द्वारा की गई तलाशी के बाद की गई है.
ED की बेंगलुरु ज़ोनल टीम ने विन्ज़ो गेम्स ऐप से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए दिल्ली और गुरुग्राम में 18 से 22 नवंबर 2025 के बीच चार स्थानों पर छापेमारी की थी. यह पूरी कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA), 2002 के तहत की गई. जांच के दौरान ईडी ने कंपनी WinZO Games Pvt. Ltd. से जुड़े करीब 505 करोड़ रुपये के संदिग्ध धन (Proceeds of Crime) को फ्रीज़ कर दिया. यह रकम बैंक खातों, बॉन्ड, फिक्स्ड डिपॉज़िट और म्यूचुअल फंड के रूप में थी.
ED ने जांच की शुरुआत उन FIRs के आधार पर की थी, जिनमें विन्ज़ो और अन्य लोगों पर धोखाधड़ी, यूज़र अकाउंट ब्लॉक करने, गलत पहचान बनाने, पैन कार्ड के गलत उपयोग और KYC से छेड़छाड़ जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे. कई शिकायतकर्ताओं ने बताया कि उनकी KYC का दुरुपयोग कर उनके नाम पर लेन-देन किए गए, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा.
जांच में सामने आया कि WinZO भारत से ही अपनी ऐप का उपयोग करके ब्राज़ील, अमेरिका और जर्मनी जैसे देशों में भी रियल मनी गेम्स (RMGs) चला रहा था. यह भी सामने आया कि केंद्र सरकार द्वारा 22 अगस्त 2025 से RMGs पर प्रतिबंध लगाने के बावजूद कंपनी ने लगभग 43 करोड़ रुपये ग्राहकों को वापस नहीं किए और यह पैसा कंपनी के पास ही पड़ा रहा.
ED की जांच में एक बड़ा खुलासा यह भी हुआ कि विन्ज़ो अपने यूज़र्स को असली खिलाड़ियों के बजाय सॉफ़्टवेयर और एल्गोरिद्म के खिलाफ खेलने पर मजबूर करता था, जबकि ग्राहकों को यह बताया जाता था कि वे असली लोगों के साथ खेल रहे हैं. कंपनी ने कई यूज़र्स के वॉलेट में पड़े पैसे निकालने पर रोक लगा दी थी, जिससे उन्हें नुकसान हुआ. ग्राहकों द्वारा लगाए गए और हारे गए पैसों से कंपनी ने अवैध तरीके से मुनाफा कमाया.
इसके अलावा, ईडी की जांच से पता चला कि विन्ज़ो भारत से ही ग्लोबल ऑपरेशन चला रहा था और ओवरसीज़ इन्वेस्टमेंट के नाम पर अमेरिका और सिंगापुर में बड़ी रकम भेजी गई. अमेरिका में WinZO US Inc. नाम की शेल कंपनी के खाते में करीब 489.90 करोड़ रुपये (55 मिलियन USD) पार्क किए गए थे, जबकि उस कंपनी का सारा संचालन भारत से ही हो रहा था.