IIT बॉम्बे का नाम बदलकर IIT मुंबई करने की चर्चा ने महाराष्ट्र की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार को साफ किया कि वह इस बदलाव के लिए प्रधानमंत्री मोदी और शिक्षा मंत्रालय को औपचारिक पत्र भेजेंगे. विवाद की शुरुआत केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह के एक बयान से हुई, जिसमें उन्होंने IIT बॉम्बे का नाम अब तक न बदले जाने पर टिप्पणी की. इसके बाद मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने इस बयान को मुंबई और महाराष्ट्र का अपमान बताया.
IIT बॉम्बे के कार्यक्रम में केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा था कि “भगवान का शुक्र है कि इसका नाम अब तक बॉम्बे ही है, मुंबई नहीं हुआ.” उन्होंने IIT मद्रास का उदाहरण देते हुए कहा कि उसका नाम भी अब तक नहीं बदला गया है. यह टिप्पणी तेजी से राजनीतिक बहस का मुद्दा बन गई, जिसे मनसे और अन्य संगठनों ने महाराष्ट्र की पहचान पर हमला बताया.
केंद्र मंत्री के बयान के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि मुंबई का नाम बदलने में भाजपा की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. उन्होंने स्पष्ट किया कि IIT बॉम्बे का नाम भी बदलकर IIT मुंबई किया जाना चाहिए. फडणवीस ने कहा कि वह इस मुद्दे पर जल्द ही प्रधानमंत्री और शिक्षा मंत्रालय को पत्र भेजेंगे और राज्य की भावनाओं को केंद्र के सामने रखेंगे.
🚨Will ask the Union government to change IIT Bombay name to IIT Mumbai: Maharashtra CM Fadnavis pic.twitter.com/qEqot44VG0
— Indian Infra Report (@Indianinfoguide) November 26, 2025
मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने जितेंद्र सिंह के बयान को ‘महाराष्ट्र से मुंबई को अलग करने की भाजपा की साजिश’ बताया. उन्होंने कहा कि मुंबई मराठी अस्मिता का प्रतीक है और इसे कमजोर करने के प्रयास लंबे समय से होते आए हैं. ठाकरे ने दावा किया कि “मुंबई नाम कुछ लोगों को इसलिए चुभता है क्योंकि यह मुंबादेवी के नाम पर रखा गया है.”
राज ठाकरे ने एक्स पर लिखे पोस्ट में कहा कि जितेंद्र सिंह का न तो मुंबई से और न ही महाराष्ट्र से कोई जुड़ाव है. उन्होंने इसे ‘शीर्ष नेतृत्व को खुश करने का प्रयास’ बताया. ठाकरे ने मराठी समुदाय से जागरूक रहने की अपील की और चेतावनी दी कि “मुंबई को बॉम्बे बनाने और पूरे MMR को दूसरे राज्य से जोड़ने की कोशिशें चल रही हैं.”
IIT बॉम्बे के नाम बदलने की संभावित कवायद ने महाराष्ट्र में राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है. जहां फडणवीस इसे ‘राज्य की भावनाओं का सम्मान’ बता रहे हैं, वहीं विपक्ष इसे ‘राजनीतिक एजेंडा’ करार दे रहा है. आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर केंद्र का रुख तय करेगा कि नाम बदलने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी या नहीं.