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अंबुबाची मेला शुरू होते ही कामाख्या मंदिर में उमड़े श्रद्धालु, जानें मेले से जुड़ी मान्यता

मंदिर का दरवाजा 22 और 23 जून के बीच की रात तीन दिनों के लिए बंद कर दिया गया था। माना जाता है कि ये तीन दिन देवी कामाख्या के सालाना मासिक धर्म का समय है।

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Manish Pandey
अंबुबाची मेला शुरू होते ही कामाख्या मंदिर में उमड़े श्रद्धालु, जानें मेले से जुड़ी मान्यता

फूल-मालाओं से लदे गुवाहाटी के मशहूर कामाख्या मंदिर में सोमवार सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लग गया। अम्बूवाची मेला के आखिरी दिन मंदिर का दरवाजा सुबह छह बजे खुला। मंदिर का दरवाजा 22 और 23 जून के बीच की रात तीन दिनों के लिए बंद कर दिया गया था। माना जाता है कि ये तीन दिन देवी कामाख्या के सालाना मासिक धर्म का समय है।

श्रद्धालु अनुराग कुमार गुप्ता ने कहा, "यहां पर आने पर आपको सब कुछ मिल जाएगा और कुछ ज्यादा करने की जरूरत नहीं है। अच्छा लगा, भीड़ में खड़ा होना पड़ा। मां के पास आओ मां सारे दुखों को हल कर देगी।"

श्रद्धालु संतोष कुमार ने कहा, "यहां दूसरी बार आना हुआ है। और पहली बार तो बहुत अच्छा लगा तो मां की कृपा से दूसरी बार भी आ गए हम। यहां पर कमरों की व्यवस्था होना बहुत कठिन है। फिर भी हमें कैसे भी कर के मिल गया था।"

अम्बूवाची मेला में हिस्सा लेने आए श्रद्धालुओं के लिए तीन अस्थाई कैंप बनाए गए थे - पांडु पोर्ट, कामाख्या रेलवे स्टेशन और सोनाराम हायर सेकेंडरी स्कूल के मैदान में। नीलांचल पहाड़ी के पास इन कैंप में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था थी। इसी पहाड़ी के पास मां कामाख्या का मंदिर है। "बंद करते हैं तो पैदल ही चलकर आना पड़ता है। इसीलिए रास्ते में टॉयलेट्स का इंतजाम किया गया। पीने के पानी का इंतजाम किया गया। और हम लोग के रास्ते में वॉलिंटियर्स भी थे।" माना जाता है कि असम के अम्बूवाची मेला में सबसे ज्यादा सैलानी पहुंचते हैं। लाखों श्रद्धालू मेले का लुत्फ उठाते हैं। मंदिर प्रशासन के मुताबिक इस साल अम्बूवाची मेले में करीब 40 लाख श्रद्धालु पहुंचे।