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हाईकोर्ट की फटकार के बाद पीछे हटे सौरव दास और आशुतोष रांका, वापस ली याचिका

दिल्ली हाईकोर्ट में सीजेपी कार्यकर्ता सौरव दास और आशुतोष रांका की हिरासत बढ़ाने के आदेशों को चुनौती देने वाली याचिका वापस ले ली गई.

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Edited By: Reepu Kumari
हाईकोर्ट की फटकार के बाद पीछे हटे सौरव दास और आशुतोष रांका, वापस ली याचिका
Courtesy: Pinterest and ANI

दिल्ली हाईकोर्ट में मंगलवार को हुई सुनवाई के बाद सीजेपी कार्यकर्ता सौरव दास और आशुतोष रांका ने अपनी याचिका वापस ले ली. उनके वकील अभिक चिमनी ने 14 और 19 अक्टूबर को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट यानी एसईएम की ओर से पारित आदेश रद्द करने की मांग की थी. सुनवाई के दौरान अदालत ने बार-बार पूछा कि जब कानून में अपील और दूसरे उपाय मौजूद हैं, तो संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत सीधे हाईकोर्ट क्यों आना पड़ा. कोर्ट ने बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन और मजिस्ट्रेट के अधिकारों पर भी सवाल किए.

अपील का रास्ता क्यों नहीं चुना

जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने कहा कि जमानतदारों को खारिज करने के फैसले को अपीलीय अदालत में चुनौती दी जा सकती है, जहां इसके कारणों की जांच हो सकती है. कोर्ट ने यह भी कहा कि हाईकोर्ट सिर्फ यह देख सकता है कि फैसला उचित प्रक्रिया से लिया गया या नहीं. तथ्यों और सबूतों का आकलन अपीलीय अदालत का काम है.

बॉन्ड टूटने पर उठे सवाल

कोर्ट ने घटनाक्रम का ब्योरा पूछा. 10 अक्टूबर को प्रदर्शन हुआ, 11 अक्टूबर को जमानत बॉन्ड दिए गए, 12 अक्टूबर को जंतर-मंतर को अधिसूचित क्षेत्र से हटाया गया और 13 अक्टूबर को दोनों वहां गए. अदालत ने कहा कि दोनों याचिकाकर्ताओं ने पहले दिए गए बॉन्ड का उल्लंघन किया है. जज ने बैरिकेड तोड़ने पर भी टिप्पणी की.

याचिकाकर्ताओं की दलील

सीजेपी के वकील ने कहा कि 19 अक्टूबर का आदेश मनमाना है और इसमें तय प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ. उन्होंने दावा किया कि जमानतदारों को चार बार खारिज किया गया और याचिका वापस लेने पर दोबारा हाईकोर्ट आना पड़ेगा. कोर्ट ने कहा कि नई याचिका भी मौजूदा याचिका जैसी ही होगी.

कोर्ट का रुख और अगली सुनवाई

अदालत ने पूछा कि जब एसईएम की अदालत में दोपहर 2 बजे सुनवाई होनी थी, तो हाईकोर्ट आने की इतनी जल्दी क्यों थी. एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने कानून की अनदेखी की है और उन्हें नए जमानतदार पेश करने को कहा गया है. इसके बाद याचिका वापस ले ली गई.

व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर कोर्ट की टिप्पणी

अदालत ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता को बेहद अहम बताया, लेकिन साथ ही पूछा कि जब कानून में राहत का उपाय मौजूद है, तो याचिकाकर्ता अपील क्यों दाखिल नहीं करते. जज ने कहा कि अगर प्रदर्शनकारी हर बार अलग मुद्दे पर प्रदर्शन की बात कहकर बॉन्ड की शर्त तोड़ते हैं, तो ऐसी स्थिति में क्या होगा. कोर्ट ने यह भी जानना चाहा कि क्या संबंधित फैसले में मिली कानूनी सुरक्षा इन याचिकाकर्ताओं पर लागू होगी.