रविवार को पेश बजट 2026 में रक्षा क्षेत्र को बड़ा बढ़ावा मिला है. कुल रक्षा बजट पिछले साल के 6.81 लाख करोड़ से बढ़कर 7.85 लाख करोड़ रुपये हो गया, यानी करीब 15% का इजाफा हुआ है. पूंजीगत खर्च में 28% की तेज बढ़ोतरी हुई है. मोदी सरकार ने पाकिस्तान और चीन से मिल रहे दोहरे खतरे के बीच सेना की तैयारियों और आधुनिकीकरण पर मजबूत फोकस दिखाया है. पिछले साल इस्लामाबाद के साथ हुई छोटी झड़प के बाद यह कदम और अहम हो गया है. हालांकि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण में रक्षा से जुड़ी कोई खास नीतिगत घोषणा नहीं की.
रक्षा पूंजीगत खर्च पिछले साल के 1.80 लाख करोड़ से बढ़कर 2.31 लाख करोड़ रुपये हो गया है. यह 28% की बड़ी छलांग है. इस राशि से उन्नत हथियार प्रणालियां खरीदी जाएंगी और स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा. सरकार का मकसद है कि सेना आधुनिक उपकरणों से लैस रहे और युद्ध की स्थिति में मजबूत दिखे.
रक्षा इकाइयों में रखरखाव, मरम्मत और ओवरहॉल के लिए इस्तेमाल होने वाले पार्ट्स के निर्माण में लगने वाले कच्चे माल पर बेसिक कस्टम ड्यूटी पूरी तरह माफ कर दी गई है. इस छूट से स्वदेशी कंपनियों को लागत कम करने में मदद मिलेगी और रक्षा उत्पादन तेज होगा.
2015-16 में रक्षा बजट 2.94 लाख करोड़ था, जो 2025-26 में 7.85 लाख करोड़ पहुंच गया. पूंजीगत खर्च भी 83,614 करोड़ से बढ़कर 2.31 लाख करोड़ हो गया. जीडीपी में रक्षा खर्च का हिस्सा भले कम हुआ हो, लेकिन टोटल बजट में लगातार इजाफा हुआ है. यह मोदी सरकार की रक्षा आधुनिकीकरण की नीति को दिखाता है.
बजट में 'मेक इन इंडिया' और रक्षा में आत्मनिर्भरता को मजबूती मिली है. पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर में आकाश एयर डिफेंस सिस्टम और नागास्त्र लूटेरिंग मुनिशन जैसे स्वदेशी हथियारों ने अच्छा प्रदर्शन किया था. रक्षा उत्पादन अब रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है. यह बजट सेना की क्षमता बढ़ाने और विदेशी निर्भरता कम करने की दिशा में बड़ा कदम है.