मणिपुर में इतना आतंक? CRPF काफिले पर हमला, 1 जवान शहीद, कई घायल

पुलिस और सुरक्षाबलों की संयुक्त टीम पेट्रोलिंग कर रही थी, तभी जमकर गोलियां बरसने लगीं. मणिपुर के जिरिबम इलाके में हुए हमले में एक जवान शहीद हो गया है. मई 2023 से ही मणिपुर में हिंसा भड़की है. जिरिबाम इलाका, कई दिनों से अशांत हैं. मैतेई और कुकी के बीच जातीय संघर्ष, यहां अब खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है.

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मणिपुर के जिरिबाम इलाके में राज्य पुलिस के साथ गश्ती कर रहे केंद्रीय रिजर्व पुलिस फोर्स (CRPF) के काफिले पर जानलेवा हमला हुआ है. हमले में एक जवान शहीद हो गया है. दो पुलिस कमांडो बुरी तरह से जख्मी हो गए हैं. पुलिस का कहना है कि असम की सीमा से लगे जिले में उग्रवादियों ने संयुक्त टीम पर जमकर गोलीबारी की. सीआरपीएफ का जवान पेट्रोलिंग कार चला रहा था, तभी उग्रवादियों ने बमबारी शुरू कर दी. 

पेट्रोलिंग कार पर ऐसी गोलीबारी हुई है कि कार छलनी-छलनी नजर आ रही है. गोलियों के निशान की वजह से विंडशील्ड टूटी हुई नजर आ रही है. गाड़ी के अंदर बैठे पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं. पुलिस ने जवाबी फायरिंग की तो उग्रवादी जंगल में जाकर छिप गए. इंफाल से करीब 220 किलोमीटर दूर ये हमला हुआ है. जिरीबाम के स्थानीय प्रशासन का कहना है कि आरोपियों की तलाश जारी है.

मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने X पर पोस्ट किया है. उनका कहना है कि यह हमला संदिग्ध कुकी उग्रवादियों ने किया है. उन्होंने इस हमले की निंदा की है.  मैतेई समुदाय और हमार जनजातियों के बीच इस इलाके में कई झड़पें हुई थीं. जिरिबाम कई दिनों से सुलग रहा था, ब भीषण हमले में ये तब्दील हो गया.

कब से भड़की है मणिपुर में हिंसा?

मणिपुर में मई 2023 में पहली बार मैतेई और कुसी जनजातियों में हिंसक झड़पों की शुरुआत हुई थी. एक साल से रह-रहकर हिंसा भड़क रही थी. दोनों समुदायों के लोगों में 1,000 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं. कुछ लोग पड़ोसी राज्य असम में छिपे हुए हैं. मणुपुर में हिंसा के मूल दोनों जातियों का संघर्ष है.

हजारों लोगों को होना पड़ा है विस्थापित

इंफाल को कछार से जोड़ने वाली जिरीबाम वाली सड़क पर भी स्थितियां सामान्य नहीं हैं. नेशनल हाईवे 2 को कुकी समुदाय के लोगों ने रोक दिया है. कांगपोकपी जिले में भी हालात सामान्य नहीं हैं. यह हाईवे नागालैंड से होते हुए असम तक जाता है. कुकी जनजातियां यह भी आरोप लगाती हैं कि मैतेई समुदाय ने सभी जरूरी वस्तुओं और मालवाहक ट्रकों को पहाड़ी इलाकों में घुसने नहीं देते हैं. मणिपुर हिंसा में 200 से ज्यादा लोग मारे गए हैं, वहीं 50,000 लोगों को विस्थापित होना पड़ा है. यह संघर्ष अब और जानलेवा हो रहा है.