चुनाव आयोग और SIR पर इंडियन एक्सप्रेस के खुलासे के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार से तत्काल इस्तीफे की मांग की है. दिपके ने चेतावनी दी कि यदि ज्ञानेश कुमार अगले 48 घंटों के भीतर अपने पद से नहीं हटते हैं, तो उनकी पार्टी पूरे देश में बड़ा आंदोलन शुरू करेगी. उन्होंने साफ कहा कि चुनाव आयोग की मौजूदा कार्यप्रणाली निष्पक्ष चुनावों की भावना के खिलाफ है.
अभिजीत दिपके ने स्पष्ट किया कि जब तक ज्ञानेश कुमार पद से इस्तीफा नहीं दे देते, तब तक CJP का विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा. पार्टी के अनुसार, यह प्रस्तावित आंदोलन इस साल जून में दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित किए गए उनके पिछले विरोध प्रदर्शन की तर्ज पर चलाया जाएगा. पार्टी अब चुनाव सुधारों और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को दुरुस्त करने पर अपना ध्यान केंद्रित कर रही है.
यह मांग चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे विशेष गहन संशोधन (SIR) कार्यक्रम को लेकर उठे विवाद के बीच आई है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 10 महीनों में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने मतदाता जोड़ने, हटाने और डेटा हैंडलिंग जैसे विषयों पर 14 बार आपत्तियां जताई थीं. हालांकि, चुनाव आयोग ने आंतरिक मतभेद के दावों को खारिज करते हुए कहा कि विचार-विमर्श एक सामान्य प्रक्रिया है और सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं.
दिपके ने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में जनता की जगह सरकार यह तय कर रही है कि कौन वोट देगा और कौन नहीं. उन्होंने दावा किया कि कुल मिलाकर 13 करोड़ से अधिक वोट हटाए गए हैं, जो कुल वोटों का लगभग 13 से 14 प्रतिशत है. दिपके के अनुसार, 2024 के लोकसभा चुनावों में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच केवल 2% का अंतर था, और इतने बड़े पैमाने पर वोटों को हटाना इसी अंतर को बढ़ाने की साजिश लगती है.
CJP प्रमुख ने आरोप लगाया कि वोटों के हटाए जाने से कई प्रमुख विपक्षी नेता सीधे प्रभावित हुए हैं. उन्होंने ममता बनर्जी, एम.के. स्टालिन, अरविंद केजरीवाल और पिनराई विजयन के निर्वाचन क्षेत्रों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां हजारों वोट काटे गए, जिससे नतीजों पर असर पड़ा. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उद्धव ठाकरे की पार्टी के विभाजन और चुनाव चिह्न के मामले में भी आयोग ने पक्षपातपूर्ण भूमिका निभाई है.
दिपके ने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष को पूरी तरह समाप्त कर देना निष्पक्ष चुनाव प्रणाली के खिलाफ है. CJP ने मांग की है कि देश में होने वाले आगामी चुनावों पर फिलहाल रोक लगाई जाए और विशेष गहन संशोधन (SIR) की पूरी प्रक्रिया को तुरंत वापस लिया जाए. पार्टी ने दोहराया कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा बेहद जरूरी है.