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'हमें वह नोटिस दिखाइए...', वंदे मातरम विवाद को लेकर CJI ने याचिकाकर्ता को क्यों लगाई फटकार?

वंदे मातरम विवाद को लेकर CJI ने सईद नूरी को लगाई फटकार. बुधवार को देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम.पंचोली की तीन सदस्यीय पीठ ने...

Ashutosh Rai
Edited By: Ashutosh Rai
'हमें वह नोटिस दिखाइए...', वंदे मातरम विवाद को लेकर CJI ने याचिकाकर्ता को क्यों लगाई फटकार?
Courtesy: X

केंद्र सरकार के सरकारी और सार्वजनिक कार्यक्रमों में राष्ट्र गीत वंदे मातरम बजाने को लेकर जारी किए गए हालिया दिशानिर्देशों पर सुप्रीम कोर्ट ने दखल देने से साफ इनकार कर दिया है. बुधवार को देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम.पंचोली की तीन सदस्यीय पीठ ने इस मामले को समय से पहले करार दिया.

अदालत ने स्पष्ट किया कि जब तक इन नियमों के उल्लंघन पर किसी सजा का प्रावधान न हो, न्यायपालिका इसमें हस्तक्षेप नहीं करेगी. जस्टिस बागची ने एक अहम टिप्पणी में कहा कि यह नियम राष्ट्र गीत गाने वाले और न गाने वाले, दोनों की स्वतंत्रता को सुरक्षित रखता है और ऐतिहासिक बिजो इमैनुएल मामले के फैसले का किसी भी तरह से उल्लंघन नहीं करता

पीठ ने अपनाया कड़ा रुख

पीठ ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि सरकार की यह अधिसूचना महज एक सलाह और प्रोटोकॉल है. कोर्ट ने साफ किया कि किसी भी नागरिक को वंदे मातरम गाने या बजाने के लिए मजबूर नहीं किया जा रहा है, इसलिए इस पर तब तक सुनवाई नहीं होगी जब तक इसे अनिवार्य न कर दिया जाए या इसके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न हो.

याचिकाकर्ता की दलील

यह याचिका एक शैक्षणिक संस्थान चलाने वाले मोहम्मद सईद नूरी ने दायर की थी. उनकी ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता और अंतरात्मा के अधिकार का हवाला देते हुए कहा कि देशभक्ति को जबरदस्ती लागू नहीं किया जा सकता. उन्होंने अदालत में तर्क दिया कि भले ही ये दिशानिर्देश केवल सलाहकारी हों, लेकिन इसकी आड़ में सामाजिक और मानसिक दबाव बनाकर लोगों को राष्ट्र गीत गाने के लिए मजबूर किया जा सकता है.

सुप्रीम कोर्ट के तीखे सवाल

इस दलील पर अदालत ने याचिकाकर्ता से कड़े सवाल किए. CJI सूर्यकांत ने नूरी से पूछा कि क्या उन्हें कोई ऐसा नोटिस मिला है जिसमें राष्ट्र गीत बजाने के लिए मजबूर किया गया हो. उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि अदालत को यह तक नहीं पता कि याचिकाकर्ता का स्कूल मान्यता प्राप्त है या नहीं.

खंड 5 का जिक्र

वहीं, जस्टिस बागची ने पूछा कि क्या 28 जनवरी की अधिसूचना के तहत राष्ट्र गीत न गाने पर किसी को कार्यक्रम से बाहर निकालने या दंडित करने का कोई प्रावधान है. उन्होंने सरकार के दिशानिर्देशों के खंड 5 का जिक्र करते हुए बताया कि इसमें may शब्द का इस्तेमाल हुआ है, जिसका अर्थ है कि यह पूरी तरह से वैकल्पिक है.