ईरान के चाबहार पोर्ट को लेकर भारत की अहम योजना एक बार फिर चर्चा में है. अमेरिका की ओर से दी गई प्रतिबंधों से छूट (Sanctions Waiver) की समय-सीमा नजदीक आने के कारण भारत और अमेरिका के बीच लगातार बातचीत चल रही है. भारत चाहता है कि यह छूट आगे भी जारी रहे, ताकि चाबहार पोर्ट पर उसका काम बिना रुकावट चलता रहे.
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग की ओर से दी गई मौजूदा छूट 26 अप्रैल 2026 तक वैध है. इस छूट के तहत भारत अमेरिकी प्रतिबंधों की मार झेले बगैर ईरान के चाबहार पोर्ट के विकास और संचालन में शामिल रह सकता है.
Peddling lies just like your leader Rahul Gandhi — your “surrender” claim on Chabahar Port is pure fiction.
— BJP (@BJP4India) January 16, 2026
Facts from MEA Spokesperson Randhir Jaiswal (January 16, 2026 update):
• The US Treasury issued a letter on October 28, 2025, granting India a sanctions waiver for… https://t.co/D3sK4sgePG pic.twitter.com/uikhMPWOzN
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि भारत मौजूदा व्यवस्था के दायरे में रहकर अमेरिका से बातचीत कर रहा है. सरकार का कहना है कि चाबहार पोर्ट सिर्फ एक व्यापारिक परियोजना नहीं, बल्कि क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के लिए बेहद जरूरी है.
चाबहार पोर्ट ईरान के दक्षिण-पूर्व में ओमान की खाड़ी के पास स्थित है. भारत के लिए यह पोर्ट इसलिए खास है क्योंकि इससे अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच आसान होती है. इस पोर्ट के जरिए भारत पाकिस्तान को बाइपास कर मिडिल ईस्ट और अफगानिस्तान तक सीधे अपना व्यापार कर सकता है.
भारत और ईरान ने साल 2024 में 10 साल का समझौता किया था, जिससे चाबहार में भारत की भूमिका अस्थायी से स्थायी दिशा में बढ़ी. इससे पहले भारत को बार-बार छोटी अवधि की छूट पर काम करना पड़ता था.
चाबहार पोर्ट अब सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है. उज्बेकिस्तान जैसे देश भी इसे वैकल्पिक व्यापार मार्ग के रूप में देख रहे हैं. यह पोर्ट इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) का भी अहम हिस्सा है, जो भारत को मध्य एशिया और यूरोप से जोड़ता है.
अब सबकी नजर इस बात पर है कि अमेरिका छूट को आगे बढ़ाता है या नहीं. इसका असर भारत की विदेश नीति, व्यापार और ईरान-अमेरिका संतुलन पर सीधा पड़ेगा.