केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने आदेश दिया है कि राज्य और केंद्र के सभी सरकारी अस्पतालों में अगर किसी स्वास्थ्य कर्मी, चिकित्सक के साथ कोई भी वारदात होती है तो 6 घंटे के अंदर FIR दर्ज हो और तत्काल प्रभाव से जांच सुरू हो जाए. शुक्रवार को स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि अगर ऐसा नहीं होता है तो जो भी जिम्मेदार होगा, उसके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी. स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि ऐसी स्थिति में 6 घंटे के भीतर ही संस्थान खुद पुलिस FIR दर्ज कराएं.
स्वास्थ्य मंत्रालय के नोटिफिकेशन में कहा गया है कि हाल के दिनों में अस्पतालों, डॉक्टरों और स्वास्थयकर्मियों पर हो रहे हमलों में इजाफा हुआ है. स्वास्थ्यकर्मियों के साथ शारीरिक हिंसा हो रही है, वे अपना काम नहीं कर पा रहे हैं. लोगों के गुस्से का उन्हें शिकार होना पड़ रहा है. ज्यादातर हिंसा या तो मरीज के परिजन या मरीज कर रहे हैं. इसे देखते हुए किसी भी स्वास्थ्यकर्मी पर अगर ड्यूटी के दौरान हमला होता है तो 6 घंटे के अंदर FIR किया जाए.
देशभर में स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा को लेकर आंदोलन हो रहे हैं. कोलकाता रेप केस के बाद गुवाहाटी, कोलकाता, चंडीगढ़, मुंबई से लेकर दिल्ली तक में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. डॉक्टर हड़ताल पर बैठे हैं. इंडियम मेडिकल एसोसिएशन के सदस्य भी गुस्से में हैं. सबकी सामूहिक मांग है कि जनसेवा कर रहे डॉक्टरों को सुरक्षा मिले, जिससे कोलकाता जैसा हादसा कभी रिपीट न हो.
आरजी कर मेडिकल कॉलेज में ट्रेनी डॉक्टर की हत्या पर सियासत भी हो रही है. डॉक्टर स्ट्राइक पर है, वहीं ममता बनर्जी सरकार, 14 अगस्त को अस्पताल पर हुए हमले तक को नहीं रोक पाई. मेडिकल प्रोफेशनल हड़ताल पर जा रहे हैं और कह रहे हैं कि अगर सुरक्षा नहीं तो काम नहीं.
कलकत्ता हाई कोर्ट ने भी शुक्रवार को ममता बनर्जी सरकार को जमकर फटकारा है. कोर्ट ने कहा है कि सरकार अगर हिंसा नहीं रोक पा रही है तो यह राज्य की असफलता है. 5000 से 7000 लोग कैंपस में घुसते हैं हिंसा करते हैं और पुलिस के पास कोई खुफिया इनपुट तक नहीं पहुंचता है. कई लोगों ने दावा किया था कि हादसे के 2 घंटे बाद पुलिस मौके पर पहुंची थी.
हाई कोर्ट ने अस्पताल प्रशासन की खामियों को लेकर जमकर लताड़ लगाई थी. पुलिस पर आरोप हैं कि पुलिस ने पहले इस केस को सुसाइड बताकर केस को रफा-दफा करना चाहा. घरवालों को बॉडी तक नहीं देखने दी गई. इसे ही लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहा है. पश्चिम बंगाल पुलिस पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अगर ऐसे ही हालत हैं तो फिर हम काम नहीं करेंगे. हमें सुरक्षा चाहिए, मृत डॉक्टर के परिजन को इंसाफ मिलना चाहिए.