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India Daily

'तरक्की से जलन क्यों?', पीयूष गोयल ने राहुल गांधी के आरोपों पर किया तीखा पलटवार; भारत-US ट्रेड डील को बताया 'बेस्ट'

भारत और अमेरिका के बीच नए व्यापार समझौते ने राजनीतिक बहस छेड़ दी है. मंत्री पीयूष गोयल ने इसके फायदों पर जोर दिया, जबकि विपक्ष ने इसे देश के हितों के खिलाफ बताया. ट्रंप के दावों पर संदेह उठ रहे हैं, लेकिन सरकार इसे बड़ी कामयाबी मान रही है.

Kanhaiya Kumar Jha
'तरक्की से जलन क्यों?', पीयूष गोयल ने राहुल गांधी के आरोपों पर किया तीखा पलटवार; भारत-US ट्रेड डील को बताया 'बेस्ट'
Courtesy: Social Media

नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए व्यापक व्यापार समझौते ने भारतीय राजनीति में उबाल पैदा कर दिया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावों और प्रधानमंत्री मोदी की पुष्टि के बाद यह स्पष्ट है कि व्यापारिक संबंधों में बड़ा बदलाव आ रहा है. हालांकि, विपक्षी दल विशेष रूप से राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने इस सौदे की शर्तों पर गंभीर सवाल उठाए हैं. वही सरकार इसे एक बड़ी कूटनीतिक जीत मान रही है, लेकिन 500 अरब डॉलर की खरीदारी का आंकड़ा विशेषज्ञों के लिए पहेली बना हुआ है.

राष्ट्रपति ट्रंप के मुताबिक भारत अमेरिकी सामानों पर शुल्क शून्य करेगा और ऊर्जा, तकनीक व कृषि क्षेत्र में 500 अरब डॉलर की खरीदारी करेगा. जवाब में अमेरिका ने भारतीय निर्यात पर शुल्क 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है. सबसे बड़ी राहत रूसी तेल खरीद पर लगी पाबंदी हटने के रूप में मिली है. हालांकि, विपक्षी नेता जयराम रमेश ने इसे 'ट्रंप-निर्भरता' कहा है क्योंकि समझौते की जानकारी भारतीय स्रोतों के बजाय अमेरिकी राजदूत से मिली. 

पीयूष गोयल ने गिनाए भारत-US ट्रेड डील के फायदे

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने इस सौदे को किसानों और मछुआरों के लिए संजीवनी बताया है. उन्होंने मोदी-ट्रंप की दोस्ती को इस सफलता का श्रेय देते हुए कहा कि इससे इंजीनियरिंग और आभूषण जैसे क्षेत्रों को भारी बढ़ावा मिलेगा. गोयल ने राहुल गांधी की आलोचना करते हुए उनकी मानसिकता को राष्ट्र-विरोधी करार दिया. उन्होंने विपक्षी दलों से जवाबदेही मांगी और आरोप लगाया कि वे देश की तरक्की से जलते हैं.

उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले तक विपक्षी नेता भी पूछ रहे थे कि समझौता कब होगा. महीनों से यह समझौता नहीं हो पा रहा था, लेकिन पीएम मोदी की दोस्ती ने ऐसा शानदार सौदा पक्का किया, जो भारत को बहुत फायदा देगा. कृषि क्षेत्र की सुरक्षा पर संदेहों को दूर करते हुए उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने हमेशा कृषि और डेयरी क्षेत्रों की रक्षा की है, और समझौते में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की गई. उन्होंने कहा, 'समुद्री उत्पाद निर्यात करने वाले मछुआरों ने तटीय इलाकों में जश्न मनाया. यह समझौता भारत के उज्ज्वल भविष्य का संकेत है. इससे इंजीनियरिंग, कपड़ा, समुद्री सामान, रत्न और आभूषण जैसे क्षेत्रों को भी फायदा होगा.'

ट्रेड डील पर विपक्ष का वार

प्रियंका गांधी ने इस समझौते को किसान विरोधी बताते हुए सोशल मीडिया पर चिंता व्यक्त की है. उन्होंने पूछा कि क्या भारतीय कृषि क्षेत्र को अमेरिकी कंपनियों के लिए पूरी तरह खोल दिया गया है. अमेरिकी अधिकारियों ने इसे 'आयात उदारीकरण की जीत' बताया है, जबकि भारत के लिए कृषि हमेशा से एक संवेदनशील 'लाल रेखा' रही है. क्या हमारे किसानों को सीधे अमेरिकी प्रतिस्पर्धा में झोंका गया है, यह बड़ा प्रश्न है.

राहुल गांधी ने लगाए गंभीर आरोप

राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री 'समझौता' (Compromised) कर चुके हैं और उन पर अंतरराष्ट्रीय दबाव है. उन्होंने चाबहार प्रोजेक्ट से भारत के बाहर होने और इजरायल यात्रा से जुड़े एपस्टीन फाइल्स के संदर्भों को दबाव का बिंदु बताया. हालांकि विदेश मंत्रालय ने इन आरोपों को निराधार बताया है. विपक्ष का मानना है कि अडानी मामले और छवि खराब होने के डर से सरकार ने आनन-फानन में यह सौदा किया है.