केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा COEMPT Edutech को ठेका दिए जाने को लेकर लगाए गए आरोपों को खारिज कर दिया है. सीबीएसई की ओर से एक्स पर कहा गया है कि ठेका देने के संबंध में लगाए गए आरोप निराधार, तथ्यहीन और भ्रामक हैं. बोर्ड ने एजेंसी को ठेका देने के पूरी प्रक्रिया पूरी की है. निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही कंपनी को ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) के लिए डिजिटलाइजेशन का काम दिया गया था.
CBSE ने बताया कि 2026 की बोर्ड परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाओं के डिजिटल मूल्यांकन के लिए 28 अगस्त, 2025 को निविदाएं जारी की गई थीं. कंपनी को काम देने के लिए बाकायदा केंद्रीय सार्वजनिक खरीद पोर्टल पर निविदा जारी की गई थी और क्वालिफाई करने वाले बोलीदाता को ही कॉन्ट्रेक्ट दिया गया.
ऑन-स्क्रीन मार्किंग पर सवाल उठे तो कांग्रेस नेता ने बुधवार को ओएसएम प्रणाली और COEMPT Edutech को ठेका दिए जाने पर सवाल उठाते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा. राहुल गांधी ने पूरे मामले की एसआईटी से स्वतंत्र न्यायिक जांच कराने की मांग भी उठाई. राहुल गांधी का आरोप है कि कंपनी का पुराना रिकॉर्ड खराब होने के बाद भी सीबीएसई ने उसे ठेका दे दिया. उन्होंने ठेका देने की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि कंपनी और केंद्र सरकार के बीच संबंध भी सार्वजनिक किए जाएं.
राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि COEMPT Edutech पहले Globarena नाम से काम करती थी. 2019 और 2023 में तेलांगना की बोर्ड परीक्षाओं में कंपनी का नाम विवादों में आया था। उस समय भी मामला ऑन-स्क्रीन मार्किंग से ही जुड़ा था और इस कंपनी के कारनामे के चलते उस समय तेलांगना में 23 छात्रों ने आत्महत्या की थी.