नई दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने डिफेंस क्षेत्र में पिछले साल से 21 प्रतिशत ज्यादा बजट का ऐलान किया है. इस बार 5.95 लाख करोड़ के खर्च की घोषणा की घोषणा की गई है. वहीं पिछले साल के बजट में 4.92 लाख करोड़ का आवंटन किया गया था.
रक्षा बजट देश के क्षमता निर्माण को दर्शाता है. जिसका नतीजा रक्षा खर्च पिछले साल के लगभग 8% से बढ़कर FY26 में GDP का 11% हो गया है. दुनिया में चल रहे उथल-पुथल के बीच देश की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है. सरकार रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में प्रयास जारी रखे हुए हैं.
ऑपरेशन सिंदूर के बाद देश में पहली बार रक्षा बजट पेश किया गया है. ऐसे में पूरे देश की नजर डिफेंस बजट की ओर था. हालांकि लोगों की उम्मीद पर इस बार का डिफेंस बजट लगभग खड़ा उतरा है. पहलगाम हमले के बाद पहली बार पेश किए गए बजट में आत्मनिर्भरता और आधुनिकीकरण पर पूरा फोकस किया गया है. 2020 के बाद से अबतक रक्षा बजट में लगभग 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. वहीं सालाना 9.3 प्रतिशत के दर से वृद्धि दर्ज की गई है. जिससे यह साफ होता है कि इस बार रक्षा के क्षेत्र में सरकार का फोकस रहा है.
रक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, रक्षा कैपेक्स FY19 में 949 बिलियन से था जो कि 2026 में बजट में 1.92 लाख करोड़ पहुंच चुका है. वहीं एक्सपर्ट की मानें तो 2027 में रक्षा के क्षेत्र में 20 प्रतिशत तक आवंटन में बढ़ोतरी संभव है. जिसमें रक्षा कैपेक्स कुल रक्षा खर्च का लगभग 30% होगा. वहीं भारत का स्वदेशीकरण अभियान भी इस क्षेत्र को बूम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. घरेलू रक्षा उत्पादन FY25 में रिकॉर्ड 1.51 लाख करोड़ तक पहुंच गया, जबकि रक्षा निर्यात 23,622 करोड़ रहा, जो वित्तीय वर्ष 2024 की तुलना में 12.04% बढ़ा है. सरकार का लक्ष्य 2029 तक रक्षा निर्माण को 3 लाख करोड़ और निर्यात को 50,000 करोड़ तक बढ़ाने का है. इस बार के बजट में रक्षा क्षेत्र पर काफी फोकस किया गया है.