नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली एक बार फिर दुनिया की बड़ी कूटनीतिक गतिविधियों का केंद्र बनने जा रही है. 12 और 13 सितंबर को यहां 18वां BRICS शिखर सम्मेलन आयोजित होगा. भारत की मेजबानी में होने वाली इस बैठक में सदस्य देशों के अलावा साझेदार और आमंत्रित देशों के नेता भी शामिल होंगे. सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब यूक्रेन और पश्चिम एशिया के संघर्षों के साथ व्यापार और आपूर्ति व्यवस्था को लेकर भी दबाव बना हुआ है. भारत ने वैश्विक दक्षिण के हितों को एजेंडे में प्रमुखता दी है.
सम्मेलन की शुरुआत 12 सितंबर को BRICS सदस्य देशों की बंद कमरे में होने वाली बैठक से होगी. दोपहर 2:35 बजे होने वाले इस सत्र का विषय समावेशी वैश्विक शासन और बहुपक्षवाद को मजबूत करना है. इसके बाद नेता भारत मंडपम में ‘भारत इनोवेट्स’ प्रदर्शनी देखेंगे. शाम 5:05 बजे आधिकारिक पारिवारिक तस्वीर और संयुक्त पौधारोपण कार्यक्रम होगा. रात 7:30 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नेताओं के लिए रात्रिभोज आयोजित करेंगे.
भारत BRICS की अध्यक्षता के दौरान वैश्विक दक्षिण को एजेंडे के केंद्र में रख रहा है. यूक्रेन और पश्चिम एशिया के संघर्षों से खाद्य, ऊर्जा और आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ने वाले आर्थिक प्रभाव को कम करना प्रमुख चिंता है. BRICS के 11 सदस्य देश दुनिया की करीब 49.5 प्रतिशत आबादी, लगभग 40 प्रतिशत वैश्विक GDP और करीब 26 प्रतिशत वैश्विक व्यापार का प्रतिनिधित्व करते हैं. ऐसे में समूह की चर्चा का असर विकासशील देशों पर भी पड़ सकता है.
BRICS की शुरुआत ब्राजील, रूस, भारत और चीन से हुई थी. बाद में दक्षिण अफ्रीका जुड़ा और 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब तथा UAE के शामिल होने से समूह का विस्तार हुआ. इंडोनेशिया 2025 में पूर्ण सदस्य बना. इसके अलावा बेलारूस, बोलीविया, क्यूबा, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम साझेदार देश हैं. इससे BRICS की एशिया, अफ्रीका, मध्य पूर्व और लैटिन अमेरिका तक पहुंच मजबूत हुई है.