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Bharat Ratna: 18 दिन और 5 भारत रत्न- क्या मोदी सरकार ने विपक्ष के साथ खेला कर दिया?

Bharat Ratna Award: 23 जनवरी को बिहार के कर्पूरी ठाकुर, 3 फरवरी को पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी और अब 9 फरवरी को पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह, पीवी नरसिम्हा राव और एग्रीकल्चर साइंटिस्ट एमएस स्वामीनाथन को भारत रत्न सम्मान देने की घोषणा की गई है.

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Om Pratap
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Bharat Ratna Award: बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर के बाद पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी और अब पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह, पीवी नरसिम्हा राव, कृषि वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथ को भारत रत्न सम्मान देने की घोषणा की गई है. यानी 18 दिनों में मोदी सरकार ने पांच अलग-अलग शख्सियतों को भारत रत्न सम्मान देने की घोषणा की है.

कहा जा रहा है कि देश के दो पूर्व प्रधानमंत्रियों और कृषि वैज्ञानिक स्वामीनाथन को भारत रत्न सम्मान देने की घोषणा मोदी सरकार का मास्टरस्ट्रोक है. कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न सम्मान दिए जाने की घोषणा के बाद बिहार में क्या कुछ हुआ, ये सभी ने देखा है. अब बारी लोकसभा चुनाव 2024 की है. 

राजनीतिक जानकारों की मानें तो जब कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न देने की घोषणा की गई, तब विपक्ष का चुनावी मुद्दा सामाजिक न्याय का था. कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न दिए जाने के फैसले से भाजपा की ओर से सामाजिक न्याय का संदेश भी दिया गया है. कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न दिए जाने के कुछ दिनों बाद ही इस फैसले का बड़ा प्रभाव देखने को मिला. बिहार में जातिगत सर्वेक्षण कराने वाले जनता दल यूनाइटेड नेता और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी NDA में शामिल हो गए.

वहीं, हिंदुत्व को भारतीय राजनीति के केंद्र में लाने वाले राजनेता आडवाणी को भारत रत्न से सम्मानित किया जाना हिंदुत्व और राम मंदिर आंदोलन की जरूरत पर मुहर लगाना है. आडवाणी को भारत रत्न मिलना उनके लिए भावुक क्षण भी है. मोदी सरकार की ओर से आडवाणी को भारत रत्न दिए जाने की घोषणा के जरिए मतदाताओं को संदेश दिया जा रहा है कि भाजपा हमेशा अपने सीनियर नेताओं की पहचान का ख्याल रखती है. 

पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न देने के मायने?

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कद्दावर नेता देश के 5वें प्रधानमंत्री थे. कई दिनों से पश्चिमी यूपी में चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न देने की मांग की जा रही थी. इस मांग को लेकर दिसंबर के दूसरे हफ्ते में पश्चिमी यूपी के लोगों ने दिल्ली की ओर मार्च भी किया था. वहीं, 2024 आम चुनाव के लिए पिछले कुछ दिनों से चौधरी चरण सिंह के पोते जयंत चौधरी के NDA में शामिल होने की चर्चा है. बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न की घोषणा के बाद जिस तरह नीतीश कुमार एनडीए में शामिल हुए, कहा जा रहा है कि चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न दिए जाने की घोषणा के बाद जयंत चौधरी भी बड़ा फैसला ले सकते हैं. 

चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न दिए जाने की घोषणा के बाद जयंत चौधरी ने ट्वीट भी किया और लिखा- दिल जीत लिया!

चौधरी चरण सिंह को किसानों का मसीहा कहा जाता है. जाट परिवार से संबंध रखने वाले चौधरी चरण सिंह अपने पॉलिटिकल करियर की शुरुआत से ही किसानों और उनके हक को लेकर मुखर रहे. उनका जन्म साल 1902 में मेरठ जिले के नूरपुर गांव  में हुआ था. उन्होंने 1923 में साइंस से अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की और 1925 में आगरा यूनिवर्सिटी पोस्ट ग्रेजुएशन पूरा किया. 

पढ़ाई के बाद चौधरी चरण सिंह ने वकालत शुरू की. साथ ही 1929 में कांग्रेस ज्वाइन कर लिया. 1951 में पहली बार उन्हें केंद्रीय मंत्री बनाया गया. इसके अगले साल यानी 1952 में उन्हें मंत्रालय दिया गया. साल 1967 में चौधरी चरण सिंह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री भी बने. हालांकि, एक साल बाद ही इस्तीफा दे दिया और 1970 में दोबारा राज्य के मुख्यमंत्री बने. 28 जुलाई 1979 को चौधरी चरण सिंह कांग्रेस और समाजवादी पार्टियों के समर्थन से देश के 5वें प्रधानमंत्री बने. 29 मई 1987 को उनका निधन हुआ था.

पीवी नरसिम्हा राव को भारत रत्न देने के मायने?

पीवी नरसिम्हा राव को भी केंद्र सरकार ने भारत रत्न देने की घोषणा की है. कांग्रेस के पूर्व नेता नरसिम्हा राव को राजनीति का चाणक्य माना जाता है. उन्होंने लगातार 8 बार चुनाव जीता था और 1991 से 1996 तक देश के 9वें प्रधानमंत्री थे. कहा जाता है कि आखिर दिनों में कांग्रेस ने उनसे किनारा कर लिया था. अब मोदी सरकार ने उन्हें भारत रत्न देने की घोषणा कर ये संदेश देने की कोशिश की है कि भाजपा विरोधियों का भी सम्मान करती है. 

साल 1921 में आंध्र प्रदेश के करीमनगर में जन्मे नरसिम्हा राव ने उस्मानिया यूनिवर्सिटी, मुंबई यूनिवर्सिटी और नागपुर यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की थी. वे आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने से पहले प्रदेश की पहले की सरकारों में मंत्री भी मंत्री रहे थे. 

 नरसिम्हा राव 1980 से 1984 तक विदेश मंत्री, जुलाई 1984 में गृह मंत्री और 1984 से 1985 तक रक्षा मंत्री भी रहे थे. वे राजीव गांधी सरकार में मानव संसाधन विकास मंत्री भी थे. भारत के 11वें राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम उन्हें देशभक्त राजनेता बताते थे. 23 दिसंबर 2004 को उनका निधन हुआ था.

एमएस स्वामीनाथन को भारत रत्न देने के मायने?

भारत सरकार ने घोषणा की कि कृषि और किसानों के कल्याण में योगदान के लिए एग्रीकल्चर साइंटिस्ट डॉक्टर एमएस स्वामीनाथन को भारत रत्न दिया जा रहा है. राजनीति के जानकारों के मुताबिक, किसानों के लिए काफी कुछ करने वाले स्वामीनाथन को भारत रत्न सम्मान देकर मोदी सरकार ने किसानों को साधने की कोशिश की है.

दरअसल, स्वामीनाथ के परिजन चाहते थे कि वे डॉक्टर बने, लेकिन बंगाल की एक घटना ने उन्हें एग्रीकल्चर साइंटिस्ट बना दिया. रिपोर्ट्स के मुताबिक,  1942 से 43 के बीच बंगाल में भूखमरी के कारण कई लोगों की मौत हुई थी. इस घटना के बाद ही स्वामीनाथन ने एग्रीकल्चर की पढ़ाई शुरू की और कोयंबटूर के एग्रीकल्चर कॉलेज से ग्रैजुएशन की पढ़ाई पूरी की. कृषि के क्षेत्र में उन्होंने कई रिसर्च भी किए. उन्हें देश में हरित क्रांति के जनक के नाम से भी जाना जाता है.

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First Published : 09 February 2024, 02:46 PM IST