बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) में चेयरमैन मानन कुमार मिश्रा के खिलाफ गंभीर आरोपों ने विवाद खड़ा कर दिया है. BCI के सह-अध्यक्ष वाईआर सदाशिव रेड्डी ने 22 अगस्त को भेजे छह पन्नों के पत्र में मिश्रा पर परिषद के कामकाज में पारदर्शिता की कमी और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं. उन्होंने 15 दिनों के भीतर इस्तीफा देने की मांग की है.
रेड्डी का दावा है कि BCI के पुराने ट्रस्ट के निष्क्रिय होने के बाद 17 सितंबर 2020 को ‘BCI Trust PEARL, First’ नाम से नया ट्रस्ट बनाया गया. आरोप है कि परिषद के 150 करोड़ इस ट्रस्ट में ट्रांसफर करने का प्रस्ताव लाया गया, जबकि ट्रस्ट डीड की प्रति परिषद के सदस्यों के सामने नहीं रखी गई.
पत्र में यह भी दावा किया गया कि BCI से मान्यता चाहने वाले कुछ लॉ कॉलेजों पर कथित तौर पर 25 लाख से 1 करोड़ तक का योगदान देने का दबाव बनाया गया. रेड्डी ने इन आरोपों की गंभीरता को देखते हुए पूरी प्रक्रिया रोकने की मांग की है.
रेड्डी ने मिश्रा से जुड़े लोगों और परिवार के सदस्यों की परिषद में नियुक्तियों पर भी सवाल उठाए. इसके अलावा NALSAR यूनिवर्सिटी के छात्रों के मामले में राज्य बार काउंसिलों को नामांकन रोकने के निर्देश की आलोचना की, जिसे बाद में वापस ले लिया गया.
रेड्डी ने BCI की विशेष बैठक बुलाने और BCI तथा संबंधित ट्रस्ट का CAG से संबद्ध पैनल की स्वतंत्र फर्म से ऑडिट कराने की मांग की है.
विवाद के बीच मानन मिश्रा ने इस्तीफे की मांग खारिज करते हुए कहा कि वे निर्वाचित होकर अध्यक्ष बने हैं और केवल मांग उठने से पद नहीं छोड़ेंगे. उन्होंने यह भी कहा कि Advocates Act में चेयरमैन के कार्यकाल पर ऐसी कोई सीमा निर्धारित नहीं है.