नई दिल्ली: मुस्लिम समुदाय के प्रमुख त्योहार बकरीद की तैयारियों के बीच मद्रास उच्च न्यायालय ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण कानूनी फैसला सुनाया है. अदालत ने राज्य में पशु क्रूरता और धार्मिक प्रथाओं से जुड़े एक संवेदनशील मामले पर सुनवाई करते हुए गोवंश की रक्षा के पक्ष में अपना मत दिया है. इस न्यायिक आदेश के बाद पूरे तमिलनाडु राज्य में कानून-व्यवस्था को बनाए रखने और अदालती गाइडलाइंस का पालन सुनिश्चित करने के लिए प्रशासनिक अमला पूरी तरह मुस्तैद हो गया है.
न्यायालय ने अपने फैसले में राज्य सरकार को बेहद कड़े निर्देश जारी किए हैं. कोर्ट ने साफ तौर पर कहा है कि बकरीद के मौके पर या साल के किसी भी अन्य दिन तमिलनाडु की सीमा के भीतर किसी भी गाय या बछड़े की हत्या नहीं की जानी चाहिए. खंडपीठ ने इस बात को रेखांकित किया कि इस विशेष धार्मिक अवसर पर अपनी आस्था प्रकट करने के लिए गोवंश की कुर्बानी देना कोई आवश्यक धार्मिक अनिवार्यता नहीं है.
जस्टिस जीआर स्वामीनाथन और जस्टिस वी लक्ष्मीनारायणन की पीठ ने रिट याचिका को स्वीकार करते हुए शीर्ष अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की है. कोर्ट के आदेशानुसार, राज्य के मुख्य सचिव और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून और व्यवस्था) को सभी जिलों में सख्त हिदायत भेजने का जिम्मा सौंपा गया है. स्थानीय प्रशासन की लापरवाही के कारण यदि कहीं भी इस आदेश का उल्लंघन हुआ, तो उसके लिए संबंधित अधिकारी जवाबदेह होंगे.
सुनवाई के दौरान पीठ ने सार्वजनिक स्थानों पर पशुओं को काटने की बढ़ती प्रवृत्ति पर भी गहरी नाराजगी व्यक्त की. न्यायाधीशों ने टिप्पणी की कि कोई भी नागरिक अपनी मनमर्जी से किसी भी खुले स्थान पर जानवरों को नहीं काट सकता है. पशुओं को केवल अधिकृत बूचड़खानों या प्रशासन द्वारा विशेष रूप से चिन्हित की गई जगहों पर ही ले जाया जा सकता है, ताकि आम जनता को किसी असुविधा का सामना न करना पड़े.
यह कानूनी मामला इंदु मक्कल काची के राज्य महासचिव सूर्य द्वारा दायर किया गया था. याचिका पर जवाब देते हुए सरकारी अधिकारियों ने अदालत में एक हलफनामा भी पेश किया था. प्रशासन ने स्वीकार किया था कि त्योहार के दौरान सार्वजनिक रास्तों से दूर कुछ अस्थायी शेड बनाए गए हैं. अधिकारियों का तर्क था कि इससे न तो यातायात बाधित हो रहा है और न ही दूसरे समुदाय के नागरिकों की भावनाएं आहत हो रही हैं.
अदालत ने इन सभी दलीलों को सुनने के बाद यह स्पष्ट किया कि धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के साथ-साथ नागरिक व्यवस्था और जीव संरक्षण का ध्यान रखना भी जरूरी है. इस ऐतिहासिक फैसले के बाद अब सरकार के सामने चुनौती होगी कि वह शांतिपूर्ण तरीके से बिना किसी विवाद के इस आदेश को जमीनी स्तर पर लागू करवाए, ताकि त्योहार के दौरान सामाजिक सौहार्द पूरी तरह बना रहे.