भारतीय राजनीति के इतिहास में ऐसी कई कहानी है, जो बताती है कि कैसे कभी एकसाथ मिल कर जनता से वादा करने वाले नेता, एक दूसरे के कट्टर विरोधी बन जाते हैं. इस लिस्ट में एकनाथ शिंदे, अजित पवार समेत कई नेताओं का नाम शामिल है. उन कहानियों में एक कहानी बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और इस चुनाव में उनके खिलाफ लड़ रहे बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी की भी है.
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे अभी कुछ देर में सामने आ जाएंगे. जिसके बाद यह साफ हो जाएगा कि क्या चौथी बार राज्य मे ममता सरकार वापसी करेगी या फिर सत्ता पलट हो जाएगा. राज्य में बीजेपी की ओर से सुवेंदु अधिकारी के नाम पर काफी चर्चा है, तो चलिए हम जानते हैं इनके इतिहास कैसा रहा है.
सुवेंदु अधिकारी एक बड़े ताकतवर राजनीतिक परिवार से आते हैं. उनके पिता शिशिर अधिकारी कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे हैं. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की कार्यकाल के दौरान उन्होंने केंद्रीय मंत्री का पद संभाला है. अपने पिता के दिखाए रास्ते पर चलते हुए सुवेंदु अधिकारी ने भी अपने राजनीतिक करियर की शुरूआत कांग्रेस से की थी. सबसे पहले उन्हें पूर्वी मेदिनीपुर की कांथी नगरपालिका से पार्षद के रूप में चुना गया.
इसके बाद उन्होंने 1998 में कांग्रेस छोड़कर ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने का फैसला लिया. उनके राजनीतिक जीवन को पंख तब मिली जब 2006 में उन्हें कांथी दक्षिण क्षेत्र से विधायक चुना गया. इसके बाद सुवेंदु अधिकारी कभी पलट कर वापस नहीं मुड़े. उन्होंने टीएमसी प्रमुख के साथ मिलकर नंदीग्राम आंदोलन में हिस्सा लिया. तमाम कठिन परिस्थितियों में टीएमसी के लिए डटे रहें और आखिर में 2011 में लेफ्ट पार्टी को 34 साल की सत्ता से को उखाड़ कर फेंक दिया.
बंगाल में 2011 में टीएमसी की सत्ता आई. इसी के साथ सुवेंदु अधिकारी को टीएमसी के बड़े नेताओं के रूप में जाने जाना लगा. इस लड़ाई में साथ देने के बाद अधिकारी को इनाम भी मिला. टीएमसी की ओर से उन्होंने लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए टिकट मिल गया. वे 2009 और 2014 में तमलुक निर्वाचन क्षेत्र से विजय रहें. यहीं से उन्होंने ममता बनर्जी का भरोसा जीत लिया. 2011 के बाद 2016 में भी राज्य में टीएमसी को जीत मिली और सुवेंदु अधिकारी को कई अहम जिम्मेदारी मिली.
पार्टी में उन्हें ममता बनर्जी के बाद सबसे मजबूत नेता के रूप में देखा जाने लगा. लेकिन कहानी में ट्विस्ट तब आई जब सीएम बनर्जी ने उनके बजाए अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी के कद को बढ़ाना शुरू कर दिया. अभिषेक बनर्जी को सत्ता में लाने की चाहत के कारण ममता बनर्जी और सुवेंदु अधिकारी में दूरी आई और 2020 में उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. इसके बाद उन्होंने बीजेपी का दामन थाम लिया. इसी के साथ सीएम बनर्जी और सुवेंदु अधिकारी एक दूसरे के कट्टर विरोधी कहे जाने लगे. इस चुनाव के दौरान दोनों नेताओं ने जमकर एक दूसरे के खिलाफ बयान दिया है. अब कुछ ही समय में यह साफ हो जाएगा कि 2026 की लड़ाई में किसे जीत मिलती है.