असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा, असम में कथित तौर पर बढ़ती मुस्लिम आबादी को लेकर सार्वजनिक मंचों से कई बार चिंता जता चुके हैं. उन्होंने हाल ही में यह ऐलान किया है कि वे मियां-मुस्लिमों को असम पर कब्जा नहीं करने देंगे. सीएम हिमंत के इस बयान पर कई विपक्षी नेता भड़क गए हैं. उनके खिलाफ असम में लोग शिकायत दर्ज कराना चाहते हैं. आरोप हैं कि सीएम हिमंत, अपने बयानों से दो समुदायों के बीच धर्म और जाति के आधार पर दुश्मनी को बढ़ावा देना चाहते हैं और दंगे कराना चाहते हैं.
मुख्यमंत्री हिमंत के खिलाफ कई नेताओं ने सामूहिक शिकायतें दी हैं. गुवाहाटी ईस्ट के डीसीपी मृणाल डेका ने भी कहा है कि उन्हें दिसपुर पुलिस स्टेशन में कुछ शिकायतें मिली हैं. उनके खिलाफ अभी तक, प्राथमिक रिपोर्ट नहीं दर्ज की गई है. सीएम हिमंत के बयानों पर विरोधी दलों के नेताओं ने सामूहिक आपत्ति जताई है और उन्हें विभाजनकारी बताया है.
असम कांग्रेस के अध्यक्ष भूपेन बोरा और असम जातीय परिषद के नेता लुरिनज्योति गोगोई ने संयुक्त विपक्षी मंच की शिकायत दी है. असम जातीय परिषद, भारतीय जनता पार्टी (BJP) और सहयोगी दलों के विरोध करने वाले अलग-अलग संगठनों का छात्र संगठन है. निर्दलीय राज्यसभा सांसद अजीत भुइयां, असम विधानसभा में विपक्ष के नेता देवव्रत सैकिया और कांग्रेस के धुबरी सांसद रकीबुल हुसैन भी शिकायत दर्ज कराई है.
हिमंत बिस्व सरमा पर आरोप है कि वे राज्य में अशांति पैदा करने के लिए आपराधिक साजिश रच रहे हैं. अगर उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जाता है तो राज्य में दंगा जैसी स्थिति बन सकती है. विपक्षी नेताओं ने पुलिस से अपील की है कि उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत अलग-अलग समुदायों में नफरत और दुश्मनी फैलाने के आरोप में केस दर्ज किया जाए.
विपक्ष का कहना है कि असम के कई जिलों में हिंदू और मुस्लिमों के बीच तकरार बढ़ी है. 22 अगस्त को नागांव जिले में एक 14 वर्षीय लड़की से हुए गैंगरेप के बाद तनाव अपने चरम पर है. हिमंत सरमा और उनकी सरकार में शामिल मंत्रियों पर आरोप लगाया है कि सभी आरोपी बंगाली मुसलमान हैं. ये लोग, असमियों की अस्मत पर हमला बोल रहे हैं. विपक्ष ने शिवसागर जिले में भड़के सांप्रदायिक तनावों को लेकर भी हिमंत सरमा को दोषी करार दिया है.
विपक्षी नेताओं ने अपनी तहरीर में कहा है, 'आप शायद जानते हैं कि ढिंग की एक लड़की के साथ बलात्कार की जघन्य वारदात हुई है, जिसके खिलाफ पूरा असम आक्रोशित है. ऐसे जघन्य कृत्य का फायदा उठाकर आरोपी एक खास समुदाय को निशाना बनाकर सांप्रदायिक उन्माद को भड़ाने की कोशिश कर रहा है, जिकी वजह से शिवसागर में अल्पसंख्यक समुदाय के कुछ लोगों पर बीजपेी कार्यकर्ताओं और नेताओं ने हमला किया है.'
विपक्ष ने अपनी शिकायत में कहा है, 'यह राज्य में दंगे जैसी स्थिति पैदा करने की साजिश है. आरोपी हिमंत बिस्व सरमा और अन्य बीजेपी नेता ऐसी अशांति पैदा करने की आपराधिक साजिश का हिस्सा हैं. हिमंत बिस्व सरमा का एक खास समुदाय को निशाना बनाकर भड़काऊ बयान देने का इतिहास रहा है.'
विपक्षी दलों ने हिमंत बिस्व सरमा के उस बयान का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा कि वे गुवाहाटी के फुटपाथों से मिया सब्जी विक्रेताओं को हटवा देंगे. मियां बंगाली मुसलमानों के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक आपमानजनक शब्द है. विपक्षी दलों ने अपनी शिकायत में ये भी कहा है कि सीएम ने एक रिपोर्टर के धर्म पर कटाक्ष किया था. उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में ही उसे मियां बुला दिया था.
विपक्ष का दावा है कि सीएम हिमंत बिस्व सरमा जिस समुदाय के लोगों को मियां कहते हैं, उन्हें बाहर निकलाने के लिए एक साल पहले अपील की थी. उन्होंने धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ अपने हमले जारी रखे थे. विपक्ष ने कहा है कि सार्वजनिक रूप से इस तरह की बकवास से अलग-अलग समुदायों के बीच नफरत पैदा हो सकती है. अगर इनकी तत्काल गिरफ्तारी नहीं हुई और लगाम नहीं लगाई गई तो वह राजनीतिक लाभ के लिए दंगा करा सकते हैं.