'भारत में डिजाइन करो वरना बंद होगी सरकारी मदद', इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों पर क्यों बरसे अश्विनी वैष्णव?

केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग को कड़ा अल्टीमेटम देते हुए भविष्य के इंसेंटिव (प्रोत्साहन) और मंजूरियों को रोकने की चेतावनी दी है. उन्होंने कंपनियों को घरेलू डिजाइन क्षमताओं और अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों को सुधारने के लिए 15 दिन का समय दिया है.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: भारत सरकार ने देश के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि कंपनियां अपनी डिजाइन क्षमताओं और गुणवत्ता मानकों में सुधार नहीं करती हैं, तो उन्हें भविष्य में मिलने वाले सरकारी प्रोत्साहन और मंजूरियों से हाथ धोना पड़ सकता है. इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस बात पर गहरी नाराजगी जाहिर की है कि उद्योग जगत से उन्हें वह अपेक्षित सहयोग नहीं मिला है, जिसकी उम्मीद इन-हाउस डिजाइन क्षमताओं के विकास के लिए की गई थी.

केंद्रीय मंत्री ने उद्योग के दिग्गजों को संबोधित करते हुए कहा कि मैन्युफैक्चरिंग का अपना महत्व हो सकता है, लेकिन असली कीमत 'डिजाइन' में छिपी होती है. उन्होंने दो-टूक शब्दों में कहा, 'यदि हमें इस मूल्य श्रृंखला का बड़ा हिस्सा हासिल करना है, तो डिजाइन भारत में ही तैयार होना चाहिए.' उन्होंने रेखांकित किया कि घरेलू डिजाइन इकोसिस्टम में निवेश करने के अलावा अब तरक्की का और कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है. सरकार चाहती है कि भारत केवल एक असेंबली हब न रहे, बल्कि नवाचार का केंद्र बने.

क्वालिटी मानकों पर भी उठे सवाल 

डिजाइन के साथ-साथ उत्पादों की गुणवत्ता भी मंत्री के रडार पर रही. वैष्णव ने सेक्टर के भीतर एक व्यवस्थित 'सिक्स सिग्मा' गुणवत्ता कार्यक्रम की कमी पर असंतोष जताया. उन्होंने आगाह किया कि बिना किसी कड़े फ्रेमवर्क और मानकों के भारतीय उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क पर कभी खरे नहीं उतर पाएंगे. अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा के लिए गुणवत्ता से समझौता करना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए घातक हो सकता है.

15 दिन का अल्टीमेटम और सख्त कार्रवाई 

सरकार की मंशा साफ है कि वह अब इस मामले में कोई ढिलाई नहीं बरतेगी. मंत्री वैष्णव ने स्पष्ट किया कि यदि आवश्यक हुआ तो सरकार मौजूदा योजनाओं के तहत फंड के वितरण और नई मंजूरियों को रोकने जैसे 'कठोर कदम' उठाने के लिए पूरी तरह तैयार है. इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग को इन कमियों को दूर करने और एक ठोस संरचनात्मक ढांचा प्रस्तावित करने के लिए केवल 15 दिनों का समय दिया गया है. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि उद्योग जगत इस अल्टीमेटम पर क्या ठोस कदम उठाता है.