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'मुसलमानों के लिए नफरत की हकीकत', असदुद्दीन ओवैसी ने कांवड़ यात्रा आदेश पर यूपी सरकार को घेरा

Kanwar Yatra Order: कांवड़ यात्रा को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से जारी आदेश पर AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने अपनी प्रतिक्रिया दी. आदेश में पहले मुजफ्फरनगर पुलिस और फिर योगी सरकार की ओर से निर्देश जारी किया कि खाने-पीने का सामान बेचने वाली दुकानों पर मालिक का नाम लिखा जाना जरूरी है. यूपी पुलिस के इस फैसले पर विपक्ष ने आपत्ति जताई थी. हालांकि बाद में योगी सरकार ने इस आदेश को पूरे कांवड़ यात्रा रूट के लिए अनिवार्य कर दिया.

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'मुसलमानों के लिए नफरत की हकीकत', असदुद्दीन ओवैसी ने कांवड़ यात्रा आदेश पर यूपी सरकार को घेरा
Courtesy: Social Media

Kanwar Yatra Order: हैदराबाद के सांसद और AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने उत्तर प्रदेश सरकार के उस हालिया आदेश पर अपनी असहमति जताई, जिसमें सभी खाने-पीने के दुकानों को अपने मालिकों और कर्मचारियों के नाम बोर्ड पर लिखने का आदेश दिया गया है. ओवैसी ने एक्स पोस्ट में कहा कि यूपी के कांवड़ मार्गों पर डर... यह भारतीय मुसलमानों के लिए नफरत की वास्तविकता है.

उन्होंने कहा कि इस गहरी नफरत का श्रेय राजनीतिक दलों और हिंदुत्व के नेताओं के साथ-साथ तथाकथित दिखावटी धर्मनिरपेक्ष दलों को भी जाता है. उत्तर प्रदेश सरकार ने शुक्रवार को निर्देश जारी किए कि खाने-पीने की दुकानों और रेस्टोरेंट मालिकों को कांवड़ यात्रा के आयोजन वाले क्षेत्रों में बोर्ड पर अपना नाम और अन्य डिटेल को लिखना होगा.

सरकार ने दिशा-निर्देशों का उद्देश्य क्या बताया?

उत्तर प्रदेश सरकार ने स्पष्ट किया कि इन दिशा-निर्देशों का उद्देश्य यात्रा का सुचारू संचालन सुनिश्चित करना और तीर्थयात्रियों की आस्था की पवित्रता को बनाए रखना है. अधिकारियों ने ये भी कहा कि 'हलाल सर्टिफाइड' प्रोडक्ट बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. हिंदू कैलेंडर के अनुसार श्रावण मास की शुरुआत के साथ 22 जुलाई से शुरू होने वाली कांवड़ यात्रा 2 अगस्त को समाप्त होगी.

दो दिन पहले भी ओवैसी ने दी थी प्रतिक्रिया

AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने दो दिन पहले भी आदेश को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधा था. उन्होंने कांवड यात्रा को लेकर मुजफ्फरनगर पुलिस की ओर से दिए गए आदेश की निंदा की थी. उन्होंने कहा था कि ये संविधान के अनुच्छेद 17 का उल्लंघन है, जो छुआछूत की बात करता है. उन्होंने आरोप लगाया था कि यूपी की योगी सरकार छुआछूत को बढ़ावा दे रही है.

18 जुलाई को ही एक अन्य एक्स पोस्ट में ओवैसी ने कहा था कि मैंने यूपी पुलिस के असंवैधानिक आदेश का विरोध किया था. इस आदेश के अनुसार दुकानदारों को दुकानों पर अपना नाम लिखना होगा ताकि कोई कांवरिया ग़लती से मुसलमान की दुकान या ठेले से कुछ ख़रीद ना ले। किसी कथित धरम गुरु ने मुझे और मोहम्मद जुबैर को धमकी देते हुए वीडियो जारी किया है. मुज़फ़्फ़रनगर में क़ानून व्यवस्था को भंग करने की दर-पर्दा धमकी भी दी गई है. एक अनैतिक और भेदभावपूर्ण आदेश का विरोध करना कोई जुर्म नहीं है. मुक़दमा उन पर दर्ज होना चाहिए जो दो समाजों को लड़ाना चाहते हैं.

ओवैसी ने पूछा- क्या एक समुदाय के लिए करेंगे काम?

ओवैसी ने कहा कि जब से योगी सरकार ने आदेश दिया है, कांवड़ यात्रा रूट में आने वाले कई दुकानों, ढाबों से मुस्लिम कर्मचारियों को यात्रा समाप्त होने तक जबरन छुट्टी पर भेज दिया गया है. ओवैसी ने पूछा कि क्या योगी सरकार सिर्फ एक समुदाय के लिए ही काम करेगी? संविधान का कोई मतलब नहीं है? योगी सरकार को ओवैसी ने चुनौती देते हुए कहा कि अगर हिम्मत है, तो फिर वे लिखित आदेश जारी करें.