Asaduddin Owaisi Reply On Mohan Bhagwat Statement: एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत के बयानों पर तीखा हमला बोला है. संघ प्रमुख की ओर से शताब्दी वर्ष के मौके पर दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा गया था कि देश में हर एक परिवार को तीन बच्चे पैदा करना चाहिए. उनके इस बयान पर ओवैसी ने तीखा हमला बोला है.
AIMIM प्रमुख ने शुक्रवार को उनके बयान पर हमला बोलते हुए कहा कि भारतीय महिलाओं पर तीन बच्चे के सिद्धांत को थोपना पूरी तरह से गलत है, उन्होंने इसे थोपने से मना किया है. साथ ही साथ उन्होंने बढ़ती बेरोजगारी को लेकर भी हमला बोला. उन्होंने कहा कि युवाओं को रोजगार नहीं मिल पा रहा है और बच्चे पैदा करने के लिए कहा जा रहा है. ओवैसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी हमला बोला है. उन्होंने पीएम पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उनके कार्यकाल के दौरान मुस्लिम समुदाय के प्रति दुश्मनी संस्थागत हो गई है.
असदुद्दीन ओवैसी ने पीटीआई से बात करते हुए कहा कि आरएसएस और उसके द्वारा प्रायोजित संगठन मुस्लिम विरोधी एजेंडा फैला रही है. इतना ही नहीं उन्होंने यह भी दावा किया कि 2011 की जनगणना के मुताबिक मुस्लिम समुदाय की जनसंख्या वृद्धि घट रही है. हिंदुओं की लगभग 80 प्रतिशत तुलना में मुसलमान समुदाय 14.23 प्रतिशत है. उन्होंने मोहन भागवत के संदेश पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि आप कहते हैं कि तीन बच्चा पैदा करो. आप होते कौन हैं किसी के पारिवारिक जीवन में दखल देने वाले? आप अपने इस तरह के बयानों से भारतीय महिलाओं पर बोझ डालने की कोशिश कर रहे है. हर किसी की अपनी प्राथमिकता होती है. उन्होंने इसे आरएसएस का दोहरा चरित्र बताया है.
संघ प्रमुख ने RSS के सौ साल पूरे होने पर आयोजित तीन दिवसीय कार्यक्रम के आखिरी दिन पर भारत के लोगों को संदेश देते हुए कहा था कि हर परिवार को तीन बच्चा करना चाहिए. उन्होंने इसके पीछे का तर्क देते हुए कहा था कि विशेषज्ञों का मानना है कि जिस भी समुदाय में बच्चे कम होते हैं, वह समुदाय वक्त के साथ विलुप्त हो जाता है. इसलिए बर्थ रेट तीन से ऊपर होना जरूरी है. उन्होंने बताया कि ऐसा और भी देशों द्वारा किया जा रहा है. इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि डॉक्टरों का भी यही मानना है कि समय पर सादी करने से और तीन बच्चे को जन्म देने से पूरे परिवार का स्वास्थ्य सही रहता है. वहीं घर बच्चे भी अच्छे संस्कार सीखते हैं, बाद में अहंकार की वजह से कोई भी मतभेद नहीं होता है.