मध्य पूर्व में जारी युद्ध के बीच भारत ने अपने आर्थिक हितों को साधने का एक नया रास्ता खोज लिया है. ईरान से कच्चे तेल की खरीद और उसका भुगतान भारतीय रुपये में करने की रणनीति भारत के लिए फायदे का सौदा बनती दिख रही है. जहां एक तरफ वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें बढ़ रही हैं, वहीं दूसरी ओर भारत सीमित जोखिम के साथ अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है.
भारत ने ईरान से कच्चे तेल की खरीद फिर से शुरू कर दी है. यह खरीद ऐसे समय में हो रही है, जब युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें बढ़ी हुई हैं. भारतीय रिफाइनरियां इस मौके का फायदा उठाकर अपेक्षाकृत सस्ते दाम पर तेल हासिल कर रही हैं, जिससे देश की ऊर्जा लागत को नियंत्रित रखने में मदद मिल रही है.
इस व्यापार की सबसे खास बात यह है कि भुगतान भारतीय रुपये में किया जा रहा है. इससे डॉलर पर निर्भरता कम होती है और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव भी घटता है. साथ ही, यह कदम भारत की स्थानीय मुद्रा को अंतरराष्ट्रीय व्यापार में मजबूत करने की दिशा में एक अहम प्रयास माना जा रहा है.
अधिकारियों के अनुसार, इस लेनदेन के लिए वोस्त्रो अकाउंट का उपयोग किया जा रहा है. इस व्यवस्था में विदेशी संस्थाएं भारत में बैंक खाता खोल सकती हैं और रुपये में भुगतान स्वीकार कर सकती हैं. इससे लेनदेन आसान हो जाता है और दोनों देशों के बीच व्यापार को नई गति मिलती है.
कुछ ट्रांजैक्शन तीसरे देशों के माध्यम से भी किए जा रहे हैं. ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और बैंकिंग जोखिमों से बचा जा सके. जिन बैंकों का वैश्विक एक्सपोजर कम है, उन्हें इस प्रक्रिया में शामिल किया जा रहा है, जिससे जोखिम को सीमित रखा जा सके.