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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने पर UNSC में हुई वोटिंग, चीन और रूस ने कर दिया खेल

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को खोलने के प्रस्ताव पर हुई वोटिंग में रूस और चीन ने वीटो का इस्तेमाल कर दिया.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने पर UNSC में हुई वोटिंग, चीन और रूस ने कर दिया खेल
Courtesy: @BRICSinfo

मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच होर्मुज स्ट्रेट को लेकर कूटनीतिक मोर्चे पर भी निराशा हाथ लगी है. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को खोलने के प्रस्ताव पर हुई वोटिंग में रूस और चीन ने वीटो का इस्तेमाल कर दिया. यह फैसला ऐसे समय आया है, जब अमेरिका की ओर से तय की गई डेडलाइन खत्म होने में कुछ ही घंटे बचे हैं. इस घटनाक्रम ने न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्तर पर चिंता और बढ़ा दी है.

सुरक्षा परिषद में अहम वोटिंग

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में होर्मुज स्ट्रेट को खोलने के प्रस्ताव पर मतदान हुआ. इस प्रस्ताव को 11 देशों का समर्थन मिला, लेकिन रूस और चीन ने अपने वीटो अधिकार का उपयोग करते हुए इसे रोक दिया. कोलंबिया और पाकिस्तान ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया. इस फैसले ने कूटनीतिक प्रयासों को झटका दिया है.

रूस और चीन का रुख

रूस और चीन पहले से ही इस प्रस्ताव के खिलाफ थे. दोनों देशों का मानना है कि किसी भी स्थिति में सैन्य बल का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए. उन्होंने प्रस्ताव के उस हिस्से का विरोध किया, जिसमें ‘जरूरी उपाय’ के नाम पर सैन्य कार्रवाई की गुंजाइश थी.

प्रस्ताव में बदलाव के बावजूद असफलता

प्रारंभिक मसौदे में सभी जरूरी कदम उठाने की बात कही गई थी, जिसमें सैन्य कार्रवाई भी शामिल हो सकती थी. विरोध के बाद इसे बदलकर केवल रक्षात्मक उपायों तक सीमित किया गया. इसके बावजूद प्रस्ताव पारित नहीं हो सका. इससे यह साफ हो गया कि सुरक्षा परिषद के भीतर इस मुद्दे पर गहरी असहमति है.

ट्रंप की डेडलाइन का दबाव

डोनाल्ड ने ईरान को चेतावनी दी है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट नहीं खोला गया, तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी. यह डेडलाइन वॉशिंगटन समय के अनुसार रात 8 बजे तक तय की गई है. इस समय सीमा के करीब आते ही तनाव और बढ़ गया है.

वैश्विक असर की आशंका

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से दुनिया के बड़े हिस्सा में तेल सप्लाई होता है. इस रास्ते में बाधा आने से ऊर्जा कीमतों में तेजी आई है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात नहीं सुधरे, तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और व्यापार पर गहरा पड़ सकता है.