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क्या हवा भारत में सीधे तौर पर बन रही है मौतों की वजह? हां या ना...सरकार की दो एजेंसियों की अलग-अलग राय

भारत में वायु प्रदूषण से मौतों को लेकर पर्यावरण मंत्रालय और ICMR के बयान एक दूसरे के विपरीत हैं. ICMR लाखों मौतों की बात करता है जबकि पर्यावरण मंत्रालय सीधा संबंध मानने से इनकार करता है.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
क्या हवा भारत में सीधे तौर पर बन रही है मौतों की वजह? हां या ना...सरकार की दो एजेंसियों की अलग-अलग राय
Courtesy: Pinterest

नई दिल्ली: क्या भारत में वायु प्रदूषण सीधे तौर पर मौतों का कारण बन रहा है? इस सवाल पर पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MOEFCC) और स्वास्थ्य मंत्रालय के तहत इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने बिल्कुल अलग-अलग जवाब दिए हैं, जिससे सरकार की सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण प्रतिक्रिया के केंद्र में एक नीतिगत विरोधाभास सामने आया है.

गुरुवार को MOEFCC ने संसद को बताया कि देश में ऐसा कोई निर्णायक डेटा नहीं है जो केवल वायु प्रदूषण के कारण होने वाली मौतों के बीच सीधा संबंध स्थापित कर सके. दो दिन पहले, ICMR ने एक RTI जवाब में कहा था कि 2017 में भारत में 12.4 लाख मौतें, जो उस साल हुई सभी मौतों का 12.5 प्रतिशत ​​थीं वह वायु प्रदूषण के कारण हुई थीं.

क्या वायु प्रदूषण एक राष्ट्रीय स्वास्थ्य संकट है?

इस बारे में राज्यसभा के एक सवाल का जवाब देते हुए, MOEFCC ने कहा कि मौतों और प्रदूषण के बीच कोई संबंध नहीं है, और यह भी कहा कि स्वच्छ वायु कार्यक्रम लागू होने के बाद कई शहरों में PM10 का स्तर कम हुआ है.

इस हफ्ते की शुरुआत में, ICMR ने पर्यावरण कार्यकर्ता अमित गुप्ता द्वारा दायर एक RTI का जवाब देते हुए कहा कि देश में लाखों मौतों के लिए वायु प्रदूषण जिम्मेदार है, यह जवाब 2017 के एक अध्ययन पर आधारित था. RTI जवाब में स्पष्ट किया गया कि मौत के अनुमान मनगढ़ंत नहीं थे, बल्कि मॉडलिंग आधारित शोध से प्राप्त किए गए थे, जिसे पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया और इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन के सहयोग से विकसित किया गया था.

2017 में कितनी प्रतिशत मौतें वायु प्रदूषण के कारण हुईं थी?

ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज स्टडी 2017' शीर्षक वाले रिसर्च के नतीजे 6 दिसंबर 2018 को द लैंसेट प्लैनेटरी हेल्थ 2018 (www.thelancet.com/planetaryhealth) में पब्लिश हुए.  आर्टिकल के अनुसार, 2017 में भारत में 1.24 मिलियन मौतें वायु प्रदूषण के कारण हुईं, जिसमें 0.67 मिलियन बाहरी पार्टिकुलेट मैटर प्रदूषण और 0.48 मिलियन घरेलू वायु प्रदूषण से हुईं. वायु प्रदूषण से होने वाली इन मौतों में से 51.4 प्रतिशत 70 साल से कम उम्र के लोगों की थीं," जवाब में यह भी कहा गया.

अमित गुप्ता ने कहा कि दोनों केंद्रीय मंत्रालयों के विचार पूरी तरह से अलग हैं, जो इस संकट को देखते हुए चिंताजनक है. हाल ही में सरकारी आंकड़ों से पता चला कि पिछले 3 सालों में दिल्ली में सांस की बीमारियों से होने वाली मौतों में लगातार बढ़ोतरी हुई है. इसमें कहा गया है कि शहर में 2024 में सांस की बीमारियों से 9,211 मौतें दर्ज की गईं, जो 2022 में 7,432 थीं. इसी समय, सर्कुलेटरी या कार्डियोवैस्कुलर बीमारियां दिल्ली में मौत का सबसे बड़ा कारण बनी रहीं, जिससे 2024 में 21,262 लोगों की जान चली गई.

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