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India Daily

'दुकानदारों से पैंट उतारने को कहा जा रहा...,' ओवैसी ने नेमप्लेट विवाद पर यूपी सरकार को लपेटा

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में दुकानदारों से पैंट उतारने को कहा जा रहा है. यह विवाद राज्य सरकार के उस निर्देश पर पैदा हुआ है जिसमें रेस्तरांओं को अपने मालिकों के नाम बोर्ड पर प्रदर्शित करने को कहा गया है.

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Edited By: Mayank Tiwari
'दुकानदारों से पैंट उतारने को कहा जा रहा...,' ओवैसी ने नेमप्लेट विवाद पर यूपी सरकार को लपेटा
Courtesy: Social Media

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने बुधवार (2 जुलाई) को उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने पिछले साल के उस निर्देश की आलोचना की, जिसमें कांवड़ यात्रा मार्ग पर मुजफ्फरनगर में दुकानदारों को अपने नाम प्रदर्शित करने के लिए कहा गया था. ओवैसी ने आरोप लगाया कि दुकानदारों को परेशान किया जा रहा है और उनसे उनकी पहचान साबित करने के लिए आधार कार्ड मांगे जा रहे हैं.

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ओवैसी ने सवाल उठाया कि योगी सरकार सुप्रीम कोर्ट के पिछले साल के अंतरिम आदेश का पालन क्यों नहीं कर रही, जिसमें कांवड़ यात्रा मार्ग पर दुकानदारों को अपने नाम और संपर्क नंबर प्रदर्शित करने के निर्देश पर रोक लगा दी गई थी. उन्होंने कहा, “मुजफ्फरनगर बाइपास के पास कई होटल हैं, जो वर्षों से वहां मौजूद हैं. क्या कांवड़ यात्रा 10 साल पहले शुरू नहीं होती थी? तब यह यात्रा शांति से होती थी, कोई अशांति नहीं थी. अब यह सब क्यों हो रहा है? अब होटल मालिकों से आधार कार्ड मांगे जा रहे हैं. दुकानदारों को परेशान किया जा रहा है.

दुकानदारों के साथ अन्याय

ओवैसी ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, “पुलिस को अपना काम करना चाहिए और उन लोगों को गिरफ्तार करना चाहिए जो दुकानदारों को परेशान कर रहे हैं. ये लोग तमाशा बना रहे हैं. वे सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का भी पालन नहीं कर रहे. कोई किसी के होटल में घुसकर उसका धर्म कैसे पूछ सकता है? यह गलत है. सरकार इस पर कुछ क्यों नहीं कर रही?

कांवड़ यात्रा और सुप्रीम कोर्ट का आदेश

इस साल कांवड़ यात्रा 11 जुलाई से 23 जुलाई तक होगी, जो हिंदू माह श्रावण के साथ मेल खाती है. यह वार्षिक तीर्थयात्रा शिव भक्तों के लिए महत्वपूर्ण है, जिसमें भक्त नंगे पांव गंगा का पवित्र जल कांवड़ में लेकर मंदिरों तक जाते हैं. पिछले साल 22 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार के उस निर्देश पर अंतरिम रोक लगा दी थी, जिसमें कांवड़ यात्रा मार्ग पर दुकानदारों को अपने नाम प्रदर्शित करने के लिए कहा गया था. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दुकानदारों को केवल अपने भोजनालय में परोसे जाने वाले भोजन का प्रकार प्रदर्शित करना होगा.

“छद्म आदेश” का आरोप

मामले की सुनवाई के दौरान, वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा था, “यह कांवड़ यात्रा के लिए एक छद्म आदेश है. अगर दुकानदार अपने नाम प्रदर्शित नहीं करते, तो उन पर जुर्माना लगाया जाएगा. हम हजारों किलोमीटर की बात कर रहे हैं. इनमें से ज्यादातर दुकानें चाय की दुकानें या फल की दुकानें हैं. यह आर्थिक मृत्यु है.

राजनीतिक प्रतिक्रिया

मुजफ्फरनगर पुलिस के इस निर्देश के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने इसे पूरे राज्य में लागू कर दिया था. उत्तराखंड और मध्य प्रदेश सरकारों ने भी इस तरह के आदेश जारी किए थे. इस कदम की विपक्ष के साथ-साथ एनडीए के कुछ सहयोगियों, जैसे जनता दल (यूनाइटेड) और राष्ट्रीय लोक दल, ने भी आलोचना की थी.