महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है. शिवसेना के वरिष्ठ नेता और आदित्य ठाकरे के सबसे करीबी माने जाने वाले सचिन अहीर ने पार्टी छोड़ दी और एकनाथ शिंदे गुट में शामिल हो गए. इस घटना को 'ऑपरेशन टाइगर-3' नाम दिया जा रहा है. सचिन अहीर शिंदे गुट में शामिल होते ही महाराष्ट्र विधान परिषद के उपसभापति पद के लिए नामांकन दाखिल कर चुके हैं.
दिलचस्प यह है कि शिंदे गुट ने अपने अपने कई दावेदारों को पीछे रखकर विपक्षी नेता को यह मौका दिया. सचिन अहीर लंबे समय से आदित्य ठाकरे के बेहद भरोसेमंद सहयोगी रहे हैं. खासकर मुंबई की वर्ली सीट पर वे उनकी मुख्य रणनीति बनाने वाले नेता थे.
साल 2019 में जब आदित्य ठाकरे पहली बार वर्ली से विधायक बने थे, तब चुनाव की पूरी कमान अहीर के पास थी. उस समय वे एनसीपी में थे, बाद में उन्हें शिवसेना में लाया गया और वर्ली-शिवड़ी क्षेत्र की जिम्मेदारी सौंपी गई.
अहीर के इस फैसले से आदित्य ठाकरे काफी नाराज नजर आए. उन्होंने कहा- 'उसे मेरे पास खींचकर लाओ, मैं खुद उनसे पूछूंगा कि पार्टी ने उन्हें क्या नहीं दिया?' आदित्य ने आगे कहा कि जीवन में कुछ सिद्धांत होने चाहिए. जब पार्टी मुश्किल समय में आपके साथ खड़ी हो तो आपको भी उसके साथ रहना चाहिए.
📍 मुंबई |
— Eknath Shinde - एकनाथ शिंदे (@mieknathshinde) June 30, 2026
विधान परिषदेच्या उपसभापतीपदाच्या निवडणुकीसाठी #शिवसेना पक्षाच्या वतीने आमदार सचिन अहिर यांनी आज आपला उमेदवारी अर्ज दाखल केला.
यावेळी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार, मंत्री चंद्रकांत पाटील, मंत्री संजय शिरसाट, आमदार कृपाल तुमाने, मनिषा… pic.twitter.com/J5dcXBQ4iN
आदित्य ठाकरे ने अहीर पर तीखा हमला करते हुए कहा कि उन्हें पार्टी में हर संभव सम्मान और जिम्मेदारी दी गई थी. वे शिवसेना (यूबीटी) के उपनेता थे, एमएलसी बनाए गए, उनकी बेटी के एनजीओ को वार्ड स्तर की समिति में जगह मिली, वे भारतीय कामगार सेना में पद पर हैं और 'बेस्ट' संघ के प्रमुख भी रहे. आदित्य ने पूछा- 'फिर भी उन्हें क्या कमी रही?'
दूसरी तरफ एकनाथ शिंदे ने सचिन अहीर का स्वागत करते हुए उन्हें सचिन तेंदुलकर की उपमा दी. शिंदे गुट अब इस नए शामिली से अपनी ताकत बढ़ाने की कोशिश कर रहा है.