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India Daily

देश में अचानक कैसे बदल गया मौसम? पाकिस्तान-अफगानिस्तान में भी बेमौसम बरसात, आसमान में 1,000 KM लंबी बारिश की पट्टी

उत्तर भारत में लगातार हो रही बारिश ने लोगों को राहत दी है. रिपोर्ट के मुताबिक आसमान में 1,000 KM लंबी बारिश की पट्टी बनी हुई है. जिससे अफगानिस्तान, पाकिस्तान में भी मौसम बदल गया है.

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Edited By: Shanu Sharma
देश में अचानक कैसे बदल गया मौसम? पाकिस्तान-अफगानिस्तान में भी बेमौसम बरसात, आसमान में 1,000 KM लंबी बारिश की पट्टी
Courtesy: ANI

उत्तर भारत में पिछले कुछ दिनों से मौसम ने करवट ली है. मार्च महीने में ही प्रचंड गर्मी ने लोगों की परेशानी बढ़ाई थी, लेकिन अब बारिश के कारण लोगों को राहत मिली है. मौसम में बदलाव ना केवल भारत में बल्कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान के कई इलाकों में भी हुआ है.

इस बार मौसम में काफी उथल-पुथल देखने को मिल रहा है. मार्च में गर्मी शुरू होनी चाहिए थी लेकिन फरवरी में ही शुरू हो  गई और मार्च में भारी बारिश, गरज-चमक, तेज हवाएं और ओले गिर रहे हैं. यह घटना काफी दुर्लभ है, क्योंकि इस बार खास पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय है.

आसमान में हजार किलोमीटर लंबी बारिश की पट्टी

अफगानिस्तान से पाकिस्तान होते हुए भारत तक लगभग 1,000 किलोमीटर लंबी बारिश की पट्टी बना रहा है. मौसम विभाग की मानें तो सामान्य पश्चिमी विक्षोभ सर्दियों में आते हैं. वे भूमध्य सागर से शुरू होकर हिमालय में हिमपात लाते हैं. लेकिन इस बार यह सीधी रेखा में चल रहा है. ऊपरी हवा में चक्रवाती घुमाव बन रहा है. इससे उत्तर-पश्चिम भारत में तेज हवाएं गरज के साथ बारिश और छिटपुट ओले पड़ रहे हैं.

इसके कारण पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भारी बारिश हुई है. दक्षिण कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, केरल और तमिलनाडु में भी मौसम में बदलाव देखा जा रहा है. कई जगहों पर निचले स्तर पर चक्रवाती सिस्टम बन रहे हैं. इस विक्षोभ में नमी मुख्य रूप से भूमध्य सागर, कैस्पियन सागर, काला सागर और फारस की खाड़ी से आ रही है. रास्ते में अरब सागर से अतिरिक्त नमी जुड़ रही है. गुजरात के ऊपर निम्न दबाव का क्षेत्र है, इससे हवाएं एक जगह जमा हो रही हैं. जिसका नतीजा तेज बारिश और तूफान देखने को मिल रहा है. 

दिल्ली-एनसीआर में मौसम का हाल

दिल्ली-एनसीआर में शुक्रवार तक हल्की से मध्यम बारिश हो रही है. गरज-चमक के साथ तेज रफ्तार से हवाएं भी चल रही है. इसके कारण लोग ठंडक महसूस कर रहे हैं, कई जगहों पर कंबल निकालने पड़े हैं. हालांकि जलवायु के अनुसार, दिसंबर से फरवरी तक हर महीने 4-6 पश्चिमी विक्षोभ आते हैं. मार्च के अंत तक जेट स्ट्रीम कमजोर हो जाती है और यह उत्तर की ओर खिसक जाती है. इसलिए बड़े सिस्टम कम बनते हैं. इतिहास में साल में सिर्फ 1-2 बार ऐसा होता है लेकिन अभी मौसम की चाल काफी बदल गई है.